महबूबा का एलान: अनुच्छेद-370 के बहाल होने तक नहीं लड़ेंगी चुनाव, पहले करनी होगी विश्वास बहाली
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि घाटी के लोग नाखुश हैं और घुटन महसूस कर रहे हैं। क्षेत्र में बहुत आत्महत्याएं हो रही हैं। इस क्षेत्र में बहुत अधिक उत्पीड़न है। इलाके के लोगों में अवसाद के भाव पैदा हो रहे हैं।
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दिल्ली में सर्वदलीय बैठक के एक दिन बाद शुक्रवार को पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल नहीं हो जाता है तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगी। यदि चुनाव में उनकी पार्टी को जीत हासिल होती है तब भी वह मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी। यह घोषणा उन्होंने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में की।
उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव से पहले हमें विश्वास बहाली के कुछ उपाय करने होंगे। लोगों का विश्वास टूटा है। जिस दिन अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किया गया तो लोगों में डर पैदा हुआ कि राज्य की डेमोग्राफी बदल जाएगी। इसलिए केंद्र को इन आशंकाओं को दूर करने की जरूरत है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बहुत अत्याचार हो रहा है। लोग सांस भी नहीं ले पा रहे हैं। प्रदेश में जमीनी स्थिति वैसी नहीं है जैसी वे दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं।
दिल की दूरियां कम करने का मतलब सब समझते हैं
महबूबा ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। हमने जो कुछ कहा उसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने सुना। जब प्रधानमंत्री दिल की दूरियां कम करनी है कहते हैं तो उसका मतलब क्या होता है कोई भी उम्मीद कर सकता है। ज्ञात हो कि बैठक में मोदी ने कहा था कि वह दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी को हटाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान के लिए गए थे
कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के राजनीतिक नेताओं की बैठक बुलाई तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। उन्होंने (केंद्र सरकार) महसूस किया है कि उनकी योजना के अनुसार चीजें नहीं हुई हैं। शायद थोड़ी सहानुभूति जो वे छोड़ गए थे इसी वजह से हमसे मिलने का फैसला किया। हम प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान के लिए वहां गए थे।
आंकड़े भले बता रहे हों कि आतंकवाद में कमी आई है, लेकिन घाटी में अभी अशांति है
यह पूछने पर कि उन्हें पीएम की बैठक में क्यों आमंत्रित किया गया जबकि उन पर आतंकियों से सहानुभूति रखने का आरोप लगाया गया था तो कहा कि आप यह गलत व्यक्ति से पूछ रहे हैं। इसका जवाब सिर्फ प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ही दे पाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंकड़े भले बता रहे हों कि आतंकवाद में कमी आई है, लेकिन अब भी अशांति है। जब एक स्थानीय युवा बंदूक उठाता है और फि र वह मारा जाता है तो उसकी कब्र पर लगा झंडा भी पाकिस्तानी झंडा बन जाता है। आतंकवादी मारे जाने के बाद पाकिस्तानी बन जाते हैं।