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कंक्रीट के जंगल नहीं बनने दिए जाएंगे घास गलीचों के मैदान : महबूबा
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Sun, 29 May 2016 09:04 PM IST
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जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
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कुदरती सौंदर्य से लकदक घास गलीचों के मैदान कंक्रीट के जंगल नहीं बनने जाएंगे। पर्यटन विकास तो ठीक है लेकिन बेहद नाजुक कुरदती सौंदर्य का इकोसिस्टम बचाना भी जरूरी है। तोसामैदान के लिए अलग डेवलपमेंट अथॉरिटी की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा गुलमर्ग, यूसमर्ग और दूधपत्री टूरिजम डेवलपमेंट अथारिटी को तोसामैदान से जोड़कर इंटिग्रेटेड सर्किट बनाया जाएगा।
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महबूबा तीन दिवसीय तोसामैदान फेस्टिवल के उदघाटन और तोसामैदान के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित कर रही थीं। फेस्टिवल में घुड़सवारी, ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा गगनचुंबी देवदार के पेड़ों से घिरे तोसामैदान को एडवेंचर टूरिजम के लिए विकसित किया जाएगा।
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आसपास की डेवलपमेंट अथारिटी से जुड़ने के बाद एक ऐसा सर्किट बनेगा जिसे एडवेंचर टूरिजम की हब में तब्दील करना मुमकिन होगा। पर्यटन विकास के लिए मुख्यमंत्री ने कहा सरकार और अवाम के बीच तालमेल होना जरूरी है। इसी तालमेल से पर्यटन विकास का चिरस्थाई मॉडल विकसित किया जा सकता है।
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चार डेवलपमेंट अथारिटी का इंटिग्रेटेड सर्किट बनेगा
जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
सरकार ऐसी गतिविधियां चलाना चाहती है जिसमें स्थानीय लोगाें को ज्यादा से ज्यादा लाभ हासिल हो सके। इसकी शुरूआत करते हुए पचास स्थानीय लोगाें को सैलानियों के लिए रहने जरूरी व्यवस्था में सरकार सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा जिस तरह से अन्य पर्यटक स्थल कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो चुके हैं तोसामैदान के साथ किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। सरकार कुदरती सुंदरता वाले इलाकों के पर्यावरण और अर्थव्यवस्था बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बाद में मुख्यमंत्री ने गुलमर्ग और यूसमर्ग में चल रहे विकास कार्योें का जायजा लिया। सीएम ने सैलानियों के साथ भी बातचीत की।
तोसामैदान को सेना की आर्टिलरी फायरिंग रेंज के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। दशकों बाद वर्ष 2014 में सेना ने तोसामैदान सरकार को लौटाया। घने जंगलों से घिरा तोसामैदान आसपास के इलाकों में सबसे बड़ा चरागाह है। तीन मील लंबे और डेढ़ मील चौड़ाई वाले तोसामैदान की हिमालयन रेंज के खाग इलाके से दूरी महज 10 किलोमीटर है। प्राचीन काल में पड़ोसी मुल्क से चरवाहे तोसामैदान आया करते थे। मुगलों ने पुंछ जाने के लिए इस रूट का इस्तेमाल किया।