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पंजाब से सुलह को तैयार, लेकिन हितों से समझौता नहीं : महबूबा
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 10 Aug 2016 09:13 PM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : अमर उजाला
रावी नदी के पानी को लेकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब सरकार के बीच हुए समझौते में शामिल शाहपुर कंडी बैराज पर अमल के लिए सरकार ने अहम फैसला लिया है। बुधवार को इसी मसले पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विशेष पैनल गठित करने का आदेश जारी किया। यह पैनल मुख्य सचिव की अध्यक्षता में काम करेगा।
पंजाब सरकार के साथ रावी नदी के पानी से संबंधित समझौते के तमाम अनसुलझे मुद्दों का निपटारा पैनल का मकसद होगा। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने साफ कहा है कि हम अनसुलझे मामलों के निपटारे को तैयार हैं, लेकिन, जम्मू-कश्मीर के हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले पैनल में योजना, विकास एवं निगरानी विभाग के आयुक्त और बिजली, राजस्व और विधि विभाग के प्रशासनिक सचिव शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 29 जनवरी 1979 को पंजाब सरकार के साथ समझौता किया गया था। लेकिन, पंजाब सरकार ने समझौते का जरा भी सम्मान नहीं किया जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर को व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है।
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शाहपुर कंडी बैराज सहित समझौते में शामिल तमाम पहलुओं का निर्धारित अवधि के भीतर निपटारा करना होगा। बैठक में समीक्षा के दौरान शाहपुर कंडी बैराज की स्थिति की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री को बताया गया कि 1979 के समझौते में शाहपुर कंडी बैराज महत्वपूर्ण पहलू है। थीन बांध और पॉवर प्लांट स्कीम के साथ शामिल किए कई बिंदुओं को पंजाब सरकार ने नजरअंदाज किया है।
इसमें सिंचाई, बिजली, मुआवजा और रोजगार के मामले अभी तक अधूरे हैं। पंजाब सरकार ने पंजाब टर्मिनेशन आफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004 के विवादित कानून को मंजूरी दी जिसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2014 में शाहपुर कंडी बैराज का काम रुकवा दिया।
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पंजाब सरकार के साथ रावी नदी के पानी से संबंधित समझौते के तमाम अनसुलझे मुद्दों का निपटारा पैनल का मकसद होगा। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने साफ कहा है कि हम अनसुलझे मामलों के निपटारे को तैयार हैं, लेकिन, जम्मू-कश्मीर के हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले पैनल में योजना, विकास एवं निगरानी विभाग के आयुक्त और बिजली, राजस्व और विधि विभाग के प्रशासनिक सचिव शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 29 जनवरी 1979 को पंजाब सरकार के साथ समझौता किया गया था। लेकिन, पंजाब सरकार ने समझौते का जरा भी सम्मान नहीं किया जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर को व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है।
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शाहपुर कंडी बैराज सहित समझौते में शामिल तमाम पहलुओं का निर्धारित अवधि के भीतर निपटारा करना होगा। बैठक में समीक्षा के दौरान शाहपुर कंडी बैराज की स्थिति की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री को बताया गया कि 1979 के समझौते में शाहपुर कंडी बैराज महत्वपूर्ण पहलू है। थीन बांध और पॉवर प्लांट स्कीम के साथ शामिल किए कई बिंदुओं को पंजाब सरकार ने नजरअंदाज किया है।
इसमें सिंचाई, बिजली, मुआवजा और रोजगार के मामले अभी तक अधूरे हैं। पंजाब सरकार ने पंजाब टर्मिनेशन आफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004 के विवादित कानून को मंजूरी दी जिसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2014 में शाहपुर कंडी बैराज का काम रुकवा दिया।