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सपनों को पूरा करने के लिए तोड़ी जमाने भर की बेड़ियां, यह हैं जम्मू-कश्मीर की पहली महिला फुटबाल कोच
Fri, 18 Jan 2019 09:55 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 18 Jan 2019 09:55 AM IST
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नादिया निगहत
- फोटो : अमर उजाला
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नादिया निगहत जम्मू-कश्मीर की पहली महिला फुटबाल कोच ही नहीं, बल्कि तमाम लड़कियों के लिए एक बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने अपना सपना पूरा करने के लिए जमाने भर की बेड़ियां तोड़ीं। लीक से हटकर करियर बनाया। किसी के विरोध की परवाह नहीं की।
आलम यह था कि जब एक लोकल कालेज में उन्होंने ट्रेनिंग सेशन ज्वाइन किया तो 40-50 लड़कों के बीच वह अकेली थीं। उन्हें और उनके परिवार को इसके लिए बहुत आलोचना भी झेलनी पड़ी। लेकिन वह पीछे नहीं हटीं। आज उनके विरोधी उनकी तारीफ करते नहीं थकते।
नादिया की राह आसान नहीं रही। शुरुआत में उनका परिवार भी उनके फुटबाल खेलने के खिलाफ था, लेकिन बाद में नादिया का फुटबाल के प्रति प्रेम देखते हुए उनके पिता ने उन्हें सपोर्ट करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने परिवार को भी मनाया।
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जाने-माने फुटबालरों क्रिस्टियानो, रोनाल्डो और लियोनल मैसी की डाई हार्ड फैन नादिया के मुताबिक स्कूल के दौरान मैच देखकर फुटबाल के प्रति उनमें लगाव पैदा हुआ। जब वह थोड़ी बड़ी हुईं तो फुटबाल की बारीकियां सीखने के लिए अमर सिंह कालेज एकेडमी ज्वाइन कर ली। जम्मू-कश्मीर फुटबाल एसोसिएशन थी उनके साथ रही।
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आलम यह था कि जब एक लोकल कालेज में उन्होंने ट्रेनिंग सेशन ज्वाइन किया तो 40-50 लड़कों के बीच वह अकेली थीं। उन्हें और उनके परिवार को इसके लिए बहुत आलोचना भी झेलनी पड़ी। लेकिन वह पीछे नहीं हटीं। आज उनके विरोधी उनकी तारीफ करते नहीं थकते।
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नादिया की राह आसान नहीं रही। शुरुआत में उनका परिवार भी उनके फुटबाल खेलने के खिलाफ था, लेकिन बाद में नादिया का फुटबाल के प्रति प्रेम देखते हुए उनके पिता ने उन्हें सपोर्ट करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने परिवार को भी मनाया।
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जाने-माने फुटबालरों क्रिस्टियानो, रोनाल्डो और लियोनल मैसी की डाई हार्ड फैन नादिया के मुताबिक स्कूल के दौरान मैच देखकर फुटबाल के प्रति उनमें लगाव पैदा हुआ। जब वह थोड़ी बड़ी हुईं तो फुटबाल की बारीकियां सीखने के लिए अमर सिंह कालेज एकेडमी ज्वाइन कर ली। जम्मू-कश्मीर फुटबाल एसोसिएशन थी उनके साथ रही।
फुटबाल केवल पुरुषों का खेल नहीं
कई बार यूं भी हुआ कि श्रीनगर में कर्फ्यू लगा और ट्रेनिंग प्रभावित हुई। लेकिन मैदान नहीं तो क्या? नादिया ने घर पर ही प्रैक्टिस जारी रखी। इस वक्त महाराष्ट्र की एक फुटबाल एकेडमी में अंडर-13 हेड कोच के तौर पर कार्यरत 20 वर्षीया नादिया के मुताबिक अगर आपने अपने सपने को पूरा करने के लिए समर्पण है तो फिर बाधाओं से न घबराएं। उनकी मां-बाप से भी अपील है कि फुटबाल को केवल पुरुषों का खेल न मानें। बच्चों और खासकर लड़कियों को उनकी मनपसंद राह अख्तियार करने दें।