केंद्र कश्मीर पर रवैया बदले तभी बातचीत संभव:मीरवाइज
हुर्रियत (म) के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि केंद्र सरकार कश्मीरियों को लेकर अपना रवैया बदले, इसके बाद ही कोई बातचीत संभव है। जिस तरह का माहौल घाटी में बना है, उससे नहीं लगता कि सरकार बातचीत के लिए संजीदा है। मीरवाइज ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि जो क्वाइट डिप्लोमेसी की खबरें सामने आ रही हैं, सब बेबुनियाद हैं।
मुझसे इस सिलसिले में कोई भी मिलने नहीं आया है। जैसा माहौल घाटी में बना है और जैसा केंद्र ने अलगाववादियों पर शिकंजा कसा हुआ है, उस माहौल में बातचीत का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। कश्मीरी लीडरशिप को हर तरफ से दबाया जा रहा है। हमारे खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है। आए दिन एनआईए की रेड कराई जा रही है। ऐसे नहीं चल सकता।
उन्होेंने कहा कि कश्मीर का मसला एक राजनीतिक मसला है, जिसे ताकत के दम पर या फोर्स के दम पर नहीं सुलझाया जा सकता। इसके लिए एक ही तरीका बातचीत है। पॉलिटिकल अप्रोच की जरूरत है, लेकिन वह तो हुर्रियत को स्टेकहोल्डर (हितधारक) ही नहीं मानते तो ऐसे में क्वाइट डिप्लोमेसी की बात कहां से आई। अब केंद्र को सोचना है कि बातचीत का सिलसिला कैसे शुरू करना है।
यह भी कहा कि कश्मीर में ऑपरेशन आल आउट चलाया जा रहा है, आए दिन गिरफ्तारियां की जाती हैं, हुर्रियत को निशाना बनाया जा रहा है। अगर सही में केंद्र कश्मीर मसले का समाधान चाहती है, तो इसके लिए नरमी बरतने की जरूरत है। कश्मीरियों के प्रति रवैया बदलना होगा ताकि हम भी बाहर निकल सकें और लोगों से बातचीत कर उनकी राय ले सकें।
मीरवाइज ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि पहले यह सब बदलाव जमीनी स्तर पर नजर आने चाहिए, फिर बाद की बात है कि कैसे बातचीत शुरू की जाए। गौरतलब है कि सूत्रों के अनुसार केंद्र से एक वरिष्ठ अधिकारी जोकि कश्मीर में आईबी का ज्वाइंट डायरेक्टर भी रह चुका है,
घाटी में कुछ अलगाववादी नेताओं से मिलकर दिल्ली लौटा है। यह सब क्वाइट डिप्लोमेसी के अंतर्गत अलगाववादियों को बातचीत के लिए शामिल करने के उद्देश्य से किया गया है।