मेधावी सम्मान समारोह: उपराज्यपाल ने कहा- शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण औजार, जिसने धरती से चांद का सफर किया मुमकिन
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि हमारी नई पीढ़ी के लिए शिक्षा, सफलता और उसके माध्यम से बदलाव ही जीवन का मिशन है। पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिला है, जिसमें उनकी दबी हुई आकांक्षाएं जागृत हुई हैं।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण औजार है, जो हमें धरती से चांद तक पहुंचाता है और आपको सूरज की आंखों में आंखें डालकर देखने का सामर्थ्य दे सकता है। विद्यालय एकमात्र ऐसी जगह है, जहां 1500 साल गुजर जाने करे बाद नई पीढ़ी को आर्यभट्ट से प्रेरणा मिल सकती है।
ये बातें उपराज्यपाल ने सोमवार को जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने जम्मू संभाग के 10वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को सम्मानित भी किया।
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि हमारी नई पीढ़ी के लिए शिक्षा, सफलता और उसके माध्यम से बदलाव ही जीवन का मिशन है। पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिला है, जिसमें उनकी दबी हुई आकांक्षाएं जागृत हुई हैं। चंद्रयान 3 के लांच में जम्मू-कश्मीर समेत देशभर के सभी हिस्सों में विद्यार्थी उत्सुक थे। स्पेस मिशन से बच्चों में नई रुचि और नई जिज्ञासा पैदा हुई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश की शिक्षा में बदलाव आ रहा
उप राज्यपाल ने कहा कि जब कोई बच्चा स्कूल छोड़ देता है तो सालों बाद उसे यह याद नहीं रहता है कि उसने कक्षा में क्या पढ़ा, बल्कि उसे शिक्षक के पढ़ाने का तरीका, सिखाने का माध्यम और उस कक्षा को अटेंड करने का उत्साह जीवनभर याद रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय बाद देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिली है। इसमें बच्चों को रुचि के हिसाब से उन्हें सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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लाइफ लांग लर्निंग कौशल पर विशेष ध्यान दें
उप राज्यपाल ने कहा कि कक्षाओं में पाठ्यक्रम के अलावा लाइफ लांग लर्निंग कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। लर्निंग की यात्रा में जब विद्यार्थी को अपनी असली क्षमता का पता चलता है, तो उसके भीतर से असफल होने का भय समाप्त हो जाता है। वह आत्मविश्वास को प्राप्त कर लेता है और यही उसे कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। अपने भीतर के भय को समाप्त करना चाहिए। चुनौतियां और समस्याओं से घबराने की जरूरत नहीं बल्कि उनसे सीखने की जरूरत है। अपनी लीडरशिप को विकसित होने का पूरा अवसर दें। आज अवसरों की कमी नहीं हैं, अनेक संभावनाएं आपके दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। आपको आगे आने की आवश्यकता है।
भविष्य के चयन में अपनी रुचि को प्राथमिकता दें
उप राज्यपाल ने दसवीं के मेधावी छात्रों को सीख देते हुए कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में हर क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक बच्चियां गोल्ड मेडल ले रही हैं। जम्मू-कश्मीर की आर्थिक प्रगति की नींव में भी बच्चियों और बहनों का योगदान है। आपकी शिक्षा का महत्वपूर्ण तत्व पैसा और जिज्ञासा है। अभी आपके लिए कॉलेज के दो साल का समय है। आपको इस बात पर ध्यान केंद्रित करना होगा कि आपकी रुचि किस क्षेत्र में है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी, डिजिटल वर्ल्ड का जमाना है।
परिणाम आधारित शिक्षा पर जोर
उप राज्यपाल ने अध्यापकों पर जोर देते हुए कहा कि वे लीक से हटकर परिणाम आधारित शिक्षा पर ध्यान दें। कक्षा में जो सिखा रहे हैं केवल वह पाठ्यक्रम का हिस्सा न रहे बल्कि उन्हें प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता और जुनून को समझना होगा। नई सोच, नई कल्पना, नवाचार को स्कूल स्तर पर लाना होगा। ऐसे विद्यार्थी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होंगे और सफलता को हासिल करेंगे। उन्होंने शिक्षा निदेशक से विशेष रूप से ध्यान देते हुए कहा कि शिक्षकों की भर्ती में यह ध्यान दिया जाए कि भले ही वह अपने सब्जेक्ट को अच्छी तरह से नहीं जानता हो, लेकिन उसमें विद्यार्थियों को सिखाने के लिए प्रेरित करने की क्षमता होनी चाहिए तभी वह असली शिक्षक है। विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले शिक्षकों का चयन किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को रचनात्मकता में लगाया जाए। तभी हमारा भारत अगले बीस वर्षों के बजाय दस वर्षों में विश्व की शक्तिशाली ताकत बन सकता है। इस दौरान मंच पर मेयर राजेंद्र शर्मा, डीडीसी चेयरमैन भारत भूषण शर्मा, स्कास्ट जम्मू के उपकुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी, एसएमवीडीयू के उपकुलपति प्रो. प्रगति कुमार मौजूद रहे।