बाढ़ के बाद अब सताने लगा खसरे का खतरा
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रियासत में बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में खसरे के साथ अन्य बीमारियों के पनपने की आशंका बनी हुई है। बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।
इसमें खसरे से बचाव के लिए केंद्र से डेढ़ लाख वैक्सीन की डोज सीरिंज के साथ राज्य के लिए भेजी गई हैं। इसमें एक लाख घाटी और पचास हजार डोज से जम्मू संभाग के प्रभावित क्षेत्रों में 6-15 साल के बच्चों को कवर किया जाएगा।
परिवार कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव राज शर्मा के अनुसार खसरे की वैक्सीन 9-12 और 16-24 माह के बीच जाती है, लेकिन बाढ़ के बाद सर्वे में पाया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में खसरे की समस्या हुई है।
6-15 साल के बच्चों पर रहेगी विशेष निगाह
बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, टायफायड, पीलिया, मलेरिया और डिसेंट्री (उल्टी-दस्त) जैसे रोगों के पनपने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। इसके अलावा खसरे की भी शिकायत पाई जाती है।
घाटी में बाढ़ ने ज्यादा तबाही मचाई है, इसलिए स्वास्थ्य निदेशालय कश्मीर में मशीनरी के साथ स्टाफ को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर रहा है। अभी तक बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल श्रीनगर और जच्चा-बच्चा अस्पताल सनंतनगर में चिकित्सा सेवाओं को बहाल कर दिया गया है।
स्किम्स बेमिना में भी चिकित्सा सुविधाएं शुरू की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पानी को साफ बनाने के लिए युद्ध स्तर पर क्लोरीन की टैबलेट बांटे जा रहे हैं। लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सरपंचों-पंचों की मदद ली जा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में सर्विलांस चिकित्सा टीमें काम कर रही हैं। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार सभी जिलों में जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी से पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।