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कश्मीर: कहीं लागू न हो जाए राज्यपाल शासन
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 30 Dec 2014 01:35 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में 23 दिसंबर को चुनावों के नतीजे आने के बाद से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसकी सरकार बनेगी, कुछ साफ नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर लोगों में भी उत्सुकता दिख रही है।
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लोगों का कहना है कि इतना समय बीतने के बाद जो असमर्थता राजनेताओं में देखने को मिल रही है, उससे लगता है कि कहीं राज्यपाल शासन न लागू हो जाए। उनमें निराशा भी है, क्योंकि चुनावों से करीब एक माह पूर्व आचार संहिता लागू होने और अब सरकार न बनने से सरकारी कार्य ठप से हो गए हैं।
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अब्दुल हक नामी स्थानीय निवासी के अनुसार उन्होंने अपने मत का इस्तेमाल इसलिए किया था कि कोई अच्छी सरकार आए और उनके काम हो सकें, लेकिन अबतक जो भी प्रक्रिया जारी है, उससे तो निराशा ही हाथ लग रही है।
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एक अन्य स्थानीय निवासी आरिफ हुसैन जो बाढ़ग्रस्त राजबाग के रहने वाले हैं, उनके अनुसार वह चाहते हैं कि जल्द सरकार का गठन हो, ताकि राहत कार्य जल्द शुरू हो सकें। खासकर बाढ़ पीड़ितों से संबंधित कार्य। क्योंकि जबतक कोई सरकार नहीं बनेगी कोई भी सरकारी कार्य नहीं शुरू हो सकते हैं।
वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार न सिर्फ स्थानीय जनता बल्कि राजनीतिक विशेषज्ञों में भी सरकार बनने को लेकर उत्सुकता है। सभी चाहते हैं कि जल्द सरकार बने और राज्य विकास की ओर बढ़े। उनके अनुसार जब तक सरकार नहीं बनती, तबतक विकास कार्यों पर ब्रेक लगी रहेगी।