एचआईवी से जुड़ी जानकारी कर देगी रोंगटे खड़े
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रियासत में वर्ष 1999 से अब तक पांच हजार लोग एचआईवी से संक्रमित हो चुके हैं। इसमें 1770 लोग एड्स से पीडि़त हैं और फुल ब्लूम एड्स (एड्स व अन्य बीमारियों से पीडि़त) से 628 लोग जान गंवा चुके हैं।
इसमें जम्मू में 552 और कश्मीर में 76 लोग शामिल हैं। राज्य में एचआईवी पाजिटिव मामलों में जम्मू जिला सबसे आगे है। राज्य के प्रवेशद्वार से लगते कठुआ, सांबा और उधमपुर जिला तथा कश्मीर संभाग में श्रीनगर जिला भी एचआईवी से प्रभावित हैं।
एचआईवी/एड्स को चालक, विस्थापित श्रमिक, सेक्स वर्कर और सुरक्षाकर्मी अपने साथ लेकर राज्य में पहुंच रहे हैं। हर साल एचआईवी के सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे हैं।
पीडि़तों के लिए जम्मू में 16 और कश्मीर में 19 इंटिग्रेटिड काउंसलिंग व टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) काम कर रहे हैं। इसमें प्राइमरी स्तर पर एचआईवी मरीज की स्क्रीनिंग की जाती है।
पाजिटिव मामलों में पीडि़त को जम्मू और कश्मीर में एक-एक (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर) एआरटी सेंटर में नियमित इलाज दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में एआरटी केंद्रों में 2546 एचआईवी पीडि़त पंजीकृत थे।
जिसमें हर साल सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे हैं। जम्मू में वर्ष 2007 में एआरटी सेंटर को खोला गया था। जिसमें सुविधाएं विकसित करके इसे वर्ष 2013 में एआरटी प्लस सेंटर बनाया गया। देश में नगालैंड राज्य में सबसे ज्यादा एचआईवी पीडि़त हैं।
इलाज को नजरअंदाज न करें पीडि़त
एड्स का मुख्य कारण शरीर में एचआईवी वायरस का फैलना है। ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंसी वायरस (एचआईवी) शरीर में तेजी से फैलकर इम्यून सिस्टम को खत्म करना शुरू कर देता है।
एड्स के लिए दो मुख्य वायरस जिम्मेदार हैं। इनमें एचआईवी-1 और एचआईवी-2 शामिल हैं। ऐसे में पीडि़तों को इलाज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एचआईवी का वायरस लगातार शरीर में बढ़ता है।
लेकिन एआरटी केंद्र में इलाज लेकर इस वायरस को बढ़ने से रोका जा सकता है। यह वायरस अपनी संख्या बढ़ाकर मानव शरीर की शारीरिक क्षमता को खत्म कर देता है।
कारण
- असुरक्षित यौन संबंध
- संक्रमित रक्त का इस्तेमाल
- संक्रमित सुई का इस्तेमाल
- पीडि़त महिला से जना बच्चा
लक्षण
किसी भी रोगी में एचआईवी संक्रमण का टेस्ट के बिना पता नहीं लग सकता है। शरीर का वजन अचानक गिरना, कोई बीमारी होने पर दवा का काम न करना इसके प्राथमिक लक्षण हैं।
पाजिटिव मामलों में पीडि़त को जम्मू और कश्मीर में एक-एक (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर) एआरटी सेंटर में नियमित इलाज दिया जाता है।
जागरूकता को बढ़ावा मिलना है जरूरी
यहां रविवार को ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फार मदर एंड चाइल्ड नई दिल्ली की ओर से प्रोजेक्ट विहान के तहत आयोजित वर्कशाप में एचआईवी और एड्स से जुड़े कई तथ्य सामने लाए गए। वक्ताओं ने कहा कि हर साल सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं।
इसका एक कारण जागरूकता को बढ़ावा मिलना है। जम्मू-कश्मीर स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और जम्मू-कश्मीर सोसायटी फार परमोशन आफ यूथ एंड मासेस के सहयोग से करवाई गई इस वर्कशाप में सोसायटी के प्रोजेक्ट निदेशक डा. सलीम उर रहमान ने बताया कि रियासत में एचआईवी संक्रमण कुल आबादी पर 0.17 प्रतिशत हैं।
एचआईवी/एड्स पीडि़तों को समाज कल्याण विभाग, राशन, किराये आदि में राहत देने पर काम हो रहा है। ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट के चीफ आपरेटिंग आफिसर राजेश रंजन ने कहा कि एड्स में जागरूकता को बढ़ाने के लिए मीडिया अहम भूमिका निभाए।
डा. रमनीक ने कहा कि टीबी और एड्स को लेकर साथ काम करने की जरूरत है। इस दौरान अश्विनी, डा. टीआर रैना, पल्लवी सिंह, संतोष कुमारी, डा. अमित वेद ने भी विचार रखे।