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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Machail Yatra Jammu Kashmir This time also there will be no Macail Yatra, decision taken due to corona infection

जम्मू-कश्मीर: इस बार भी नहीं होगी मचैल यात्रा, कोरोना संक्रमण की वजह से लिया गया फैसला

Sat, 17 Jul 2021 01:49 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 17 Jul 2021 01:49 PM IST
सार

अनुच्छेद-370 और 35-ए के निष्प्रभावी होने के बाद भी यात्रा स्थगित कर दी गई थी। हालांकि, माता की छड़ी जम्मू से दरबार तक लाई गई थी।

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Machail Yatra Jammu Kashmir This time also there will be no Macail Yatra, decision taken due to corona infection
मचैल यात्रा - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

विस्तार

श्री अमरनाथ के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे प्रसिद्ध मचैल यात्रा इस बार भी नहीं होगी। जिला उपायुक्त ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। महामारी के कारण पिछले वर्ष इक्का दुक्का श्रद्धालु दरबार में माथा टेकने पहुंचे थे। तब माता की छड़ी मुबारक आई थी। हालांकि उसमें अधिक लोगों को शामिल नहीं होने दिया गया था।

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मचैल गांव और मंदिर के बारे में अहम बातें
किश्तवाड़ जिला मुख्यालय से करीब 95 किलोमीटर दूर पाडर इलाके में हरे-भरे वृक्षों से घिरे पर्वत व नदी-नालों के बीच मचैल गांव बसा है। यह गांव माता भगवती श्री चंडी के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस पवित्र स्थान को मचैल वाली माता के नाम से भी जाना जाता है।
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माता चंडी यहां कब प्रकट हुईं, इस बारे में ठीक से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। किंवदंती के अनुसार किसी भक्त को मां ने सपने में दर्शन दिए कि मैं गांव मचैल में प्रकट होना चाहती हूं। आप कल प्रात: उस स्थान पर पहुंच जाना। भक्त बिना किसी को बताए जब वहां पहुंचा और तो माता को पिंडी रूप में पाकर अति प्रसन्न हुआ। बाद में वह एक छोटा-सा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना करने लगा।
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मंदिर के बाहरी भाग में पौराणिक देवी देवताओं की लकड़ी की बनी हुई कई पटिकाएं हैं। मंदिर के भीतर गर्भग्रह में मां चंडी एक पिंडी के रूप में विराजमान हैं। इस पिंडी के साथ ही दो मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जिनमें एक मूर्ति चांदी की है।


इस मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि इसे बहुत समय पहले जंस्कार (लद्दाख) के बौद्ध मतावलंबी भोंटों ने मंदिर में चढ़ाया था। इसलिए इस मूर्ति को भोट मूर्ति भी कहते हैं। इन मूर्तियों पर कई प्रकार के आभूषण सजे हैं। मंदिर के सामने खुला मैदान है, जहां यात्री खड़े हो सकते हैं। इस देवी पीठ के बारे में कई किवदंतियां हैं।

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