Lockdown in Jammu Kashmir: जानिए एक महीने का हाल, कहां हुआ पालन और कहां उड़ीं धज्जियां
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24 मार्च की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लॉकडाउन का एलान किया था, जिसका शनिवार को एक महीना पूरा हो गया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन के चलते सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। लखनपुर से लद्दाख तक की सीमाएं सील होने से कोरोना से जंग में लॉकडाउन काफी कारगर सिद्ध हुआ है। अबतक प्रदेश में कोरोना संक्रमित 494 मामले सामने आए हैं। इसमें जम्मू से 57 और कश्मीर संभाग से 437 मामले हैं। प्रदेश में कोरोना से हुई कुल मौतों की संख्या छह है जिसमें पांच कश्मीर के हैं। लॉकडाउन का ही असर है कि प्रदेश में कोरोना से बेहतर तरीके से निपटा जा रहा है।
हालांकि पर्यटन पर इसकी भारी मार पड़ी है। लेकिन सुखद बात यह है कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर हम कोरोना से नहीं जीतेंगे तो भविष्य ही अंधकार में चला जाएगा। लोगों ने कहा कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद परिस्थितियां फिर से सही होंगी और हमारा काम अच्छी तरह से चलेगा। हमारी प्राथमिकता है कि किसी भी तरह से कोरोना को हराया जाए। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के शब्द जान है तो जहान है को दोहराते हुए कहा कि ये शब्द हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जरूरी दुकानें खोलने का आदेश
उधर, केंद्र सरकार के निर्देश पर जम्मू कश्मीर सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दुकानें खोलने का आदेश जारी किया है। मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शहरी क्षेत्र में खाने-पीने की दुकानें छोड़कर आवासीय क्षेत्रों की दुकानें और शॉपिंग कांप्लेक्स खुल सकेंगे। खाने-पीने, सिनेमा हॉल, मॉल, रेस्तरां, पार्लर, सैलून, जिम, खेल परिसर, स्वीमिंग पूल, पार्क, बार, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल आदि नहीं खुल सकेंगे।
इसके साथ ही मुख्य बाजार भी नहीं खुल सकेंगे। यहां सिर्फ किराना, बेकरी और फल-सब्जी की दुकानें ही खुल सकेंगी। ग्रामीण इलाकों में भी खाने-पीने, सिनेमा हॉल, मॉल, रेस्तरां, पार्लर, सैलून, जिम, खेल परिसर, स्वीमिंग पूल, पार्क, बार, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल आदि नहीं खुल सकेंगे। इसके साथ ही सिंगल और मल्टी ब्रांड मॉल भी नहीं खुलेंगे।
इसी आदेश के मद्देनजर जम्मू शहर और संभाग में प्रतिबंधित इलाकों को छोड़कर सभी जगहों पर आज यानी कि रविवार को दुकानें खुलीं। इस दौरान दुकानदारों के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। दुकानदारों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकारी के इस आदेश से हम काफी सहूलियत मिलेगी। क्योंकि लॉकडाउन ने रोजगार छीन लिया, हम लोग रोजी-रोटी को मोहताज हो गए। लेकिन सरकार के प्रयास और उठाए गए कदमों की हम प्रशंसा करते हैं। हम कोरोना से जंग में सरकार के साथ हैं। पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। उधर, कश्मीर में संक्रमितों की अधिक संख्या और बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने पूर्व की तरह ही प्रतिबंध जारी रखा है।
लॉकडाउन के चलते ऐसा रहा जम्मू कश्मीर का एक महीने का हाल
सतवारी में पांच साल से कुलचे का ठेला लगाने वाले उत्तर प्रदेश के राम लाल ने कहा कि एक महीने से काम बंद पड़ा है। पहले उम्मीद थी सरकार से मदद मिलेगी, पर जब कुछ नहीं मिला तो कुलचे वाले ठेले में ही सब्जियां बेचनी शुरू कर दी। सुबह मंडी से सब्जी लाता हूं फिर दिन भर गली मोहल्लों में जाकर बेचता हूं। बस या ट्रेन चलती तो गांव चले जाते, खेती करते पर यहां तो बुरी हालात है।
मोबाइल की दुकान में बेच रहे सब्जी
बेलीचराना में मोबाइल का काम करने वाले संतोष अब दुकान में सब्जी बेच रहे हैं। कहा कि लॉकडाउन के कारण मोबाइल का काम बंद हो गया। फिर दुकान में ही सब्जी बेचना शुरू किया, जिससे घर की दाल-रोटी चल रही है।
प्रवासियों को राशन महज कागजों पर
शहर में ऐसे हजारों लोग हैं जो घर का खर्च चलाने के लिए सब्जी विक्रेता बन गए हैं। इनमें ज्यादातर बाहरी राज्यों के श्रमिक जिन्हें परिवार के पालन-पोषण की चिंता सता रही है। बाहरी राज्यों के श्रमिकों को राशन देने का प्रदेश सरकार का दावा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।
पाबंदियां हटाने का भी नहीं हुआ फायदा
अगर बात पर्यटन की करें तो देशभर में कोरोना वायरस का प्रसार होने और 18 मार्च को जम्मू कश्मीर में पहला कोरोना संक्रमित सामने आने के बाद वैष्णो देवी यात्रा को भी रोक दिया गया था। इससे पूर्व रोजाना लगभग 18-20 हजार श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दर्शनों के लिए आ रहे थे। 18 मार्च को जिस वक्त यात्रा को बंद करने की घोषणा की गई थी उसी वक्त करीब 14 हजार श्रद्धालुओं का माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए पंजीकरण किया गया था। इसके बाद से माता वैष्णो देवी के दरबार में सन्नाटा पसरा हुआ है।
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 10 अक्तूबर को सरकार ने जम्मू कश्मीर में पर्यटकों के आने पर लगी पाबंदियों को हटा लिया था, मगर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू कश्मीर को कोई फायदा नहीं हुआ। पर्यटकों में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति से भय का माहौल बना रहा। इस कारण पर्यटकों ने जम्मू कश्मीर का रुख करने की बजाय हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थालों में जाना उचित समझा।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए थे देश विदेश में रोड शो
अनच्छुेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने पर्यटकों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश के विभिन्न शहरों और महानगरों में रोड शो किए। कई कारोबारियों के साथ समझौते भी किए। मगर कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने से तमाम तरह की योजनाएं धरी की धरी रह गईं। इस बार श्रीनगर के इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में भी पर्यटकों की आमद पर कोरोना ने रोक लगा दी। तीन से चार सप्ताह तक खिलने वाले इस फूल के निहारने के लिए वर्ष 2019 में 2.5 लाख पर्यटक आए थे, मगर इस बार इसे निहारने वाला कोई नहीं है।
महिलाओं ने मोर्चा संभाला
अगर बात करें लॉकडाउन के पालन और उल्लंघन की तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लोगों ने सरकार के आदेशों का अच्छी तरह से पालन किया है। कुछ मामले ऐसे भी आए जहां लोगों ने उल्लंघन करने की कोशिश की तो महिलाओं ने मोर्चा संभालकर उन्हें समझाया।
ऐसा ही एक मामला जम्मू संभाग के चट्ठा इलाके का है। जहां पूर्व सरपंच गुरमीत कौर के नेतृत्व में आठ-दस महिलाओं ने एक टीम बनाई है। यह टीम हॉकी और लाठी-डंडे लेकर घर से बाहर निकलने वाले लोगों को रोक रही है। साथ ही समझा रही हैं कि बेवजह घर से बाहर निकलने के कारण, आप खुद के साथ अपने परिवार और समाज के लिए संकट बन सकते हैं।
महिलाओं की टीम चट्ठा फॉर्म और चट्ठा पिंड इलाके में सक्रिय है। ये टीम घर से बाहर निकलने वाले लोगों को लॉकडाउन का मतलब समझा रही हैं। टीम ने लोगों को बताया कि इस दौरान घर से बाहर निकल गए तो कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में हम सफल नहीं हो सकेंगे। कई लोगों ने आनाकानी भी की, लेकिन बाद में समझाने पर वे मान गए।
पूर्व सरपंच गुरमीत ने बताया कि लोग अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकल रहे थे। इसे देखते हुए मोहल्ले की महिलाओं ने टीम बनाकर लॉकडाउन का सही से पालन कराने का फैसला किया। इसके तहत तय हुआ कि अलग-अलग इलाकों में रोजाना घर से बाहर निकलने वाले लोगों को समझाया जाएगा।
उनका कहना है कि महिलाओं के समझाने पर लोग जल्दी मान जाएंगे, ऐसा महसूस करते हुए यह पहल की गई है। ज्ञात हो कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में लोगों ने अपने-अपने गांव की पहरेदारी शुरू कर दी है। बताया कि गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कुछ स्थानों पर साबुन से हाथ धोने की भी व्यवस्था की गई है।
महिलाओं की इस टीम में बुजुर्ग महिलाएं भी हैं। पूर्व सरपंच के अनुसार हरजीत कौर (60) व स्वर्ण कौर (60) टीम की सदस्य हैं। इसके साथ ही संतोष कौर, दसमीत कौर, परमजीत कौर भी पूरी सक्रियता के साथ लोगों को समझाने में अपना सहयोग दे रही हैं।