एलजी बोले: अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू-कश्मीर के लोग अधिकारों से रहे वंचित, मोदी ने भेदभाव से दिलाई निजात
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि 70 साल से समाज के अनेक वर्गों को समान अधिकारों से वंचित रखा गया था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद आज वहां हर नागरिक को समान अधिकार मिले हैं। भयमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था स्थापित हुई है।
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उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि अनुच्छेद 370 और 35ए की वजह से पिछले 70 साल से जम्मू-कश्मीर के अनेक वर्गों को समान अधिकारों से वंचित रखा गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिबद्धता के साथ जम्मू-कश्मीर की बड़ी आबादी को भेदभाव से निजात दिलाने की हिम्मत दिखाई। वे नई दिल्ली में पत्रकार अजय सिंह की मोदी पर लिखी पुस्तक के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहे।
उप राज्यपाल ने कहा कि 1947 से जम्मू कश्मीर के संपूर्ण विलय की चर्चा हुई, अभियान चलाया गया और आर्गेनाइजर के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने लाल चौक पर मुरली मनोहर जोशी के साथ 1992 में तिरंगा फहराकर उसका संकेत भी दिया था, लेकिन पहली बार प्रतिबद्धता के साथ जम्मू कश्मीर की बड़ी आबादी को भेदभाव से निजात दिलाने की हिम्मत किसी ने दिखाई तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए की समाप्ति के पश्चात आठ अगस्त 2019 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि इस व्यवस्था ने जम्मू कश्मीर को अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। जनता के लाभ के लिए संसद द्वारा जितने कानून बनाए जाते थे उनका लाभ जम्मू-कश्मीर को नहीं मिलता था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पर कोई बहस नहीं होती थी। 70 साल से समाज के अनेक वर्गों को समान अधिकारों से वंचित रखा गया था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद आज वहां हर नागरिक को समान अधिकार मिले हैं। भयमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था स्थापित हुई है।
उन्होंने कहा कि पहली बार विकास की रैंकिंग में जम्मू-कश्मीर देश के अन्य विकसित राज्यों को टक्कर दे रहा है। मैं समझता हूं यह कहना उचित होगा कि बाबा साहब आंबेडकर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरा किया है।
सांचे से हटकर लिखी गई पुस्तक
उप राज्यपाल ने कहा कि लेखक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा के ऊपर मुझे लगता है 50 से ज्यादा किताबें लिखी हैं। लगभग 26 किताबें तो मैंने स्वयं देखी हैं। किताब लिखना अपने आप में बहुत बड़ी तपस्या है। इसलिए मैं कहूंगा कि सभी लेखकों ने बहुत मेहनत की है, लेकिन इस किताब की खूबी है कि लेखक ने सांचे से अलग हटकर लीडरशिप और आर्गेनाइजेशनल स्किल्स को प्रस्तुत करने की हिम्मत की है।