J&K: मुहर्रम के लिए समय पर पूरी हों तैयारी, शिया समुदाय की समस्याएं करें दूर, एलजी ने अफसरों को दिए निर्देश
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि मुहर्रम को सुचारू रूप से मनाने के लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से ही कर ली जानी चाहिए। एलजी ने नियमित बाजार निरीक्षण और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि शिया समुदाय के प्रमुख सदस्यों और धार्मिक नेताओं के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और मांगों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, ताकि मुहर्रम का सुचारू रूप से आयोजित किया जा सके। ये निर्देश उपराज्यपाल ने मंगलवार को श्रीनगर नागरिक सचिवालय में मुहर्रम की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।
उन्होंने जिला प्रशासन तथा वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इमामबाड़ों तक बेहतर सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति और पेयजल सुविधाएं, विशेष रूप से इमामबाड़ों में तथा उसके आसपास उचित साफ-सफाई तथा स्वच्छता उपाय, आवश्यकतानुसार राशन व अन्य सुविधाओं का अग्रिम वितरण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।
मनोज सिन्हा ने कहा कि मुहर्रम को सुचारू रूप से मनाने के लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से ही कर ली जानी चाहिए। एलजी ने नियमित बाजार निरीक्षण और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
एलजी ने प्रमुख धार्मिक स्थलों और समारोहों में सुरक्षा, सुचारू यातायात प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में विस्तृत व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। उपायुक्तों ने आगामी मुहर्रम के मद्देनजर अपने-अपने जिला प्रशासन की तैयारियों के बारे में अध्यक्ष को जानकारी दी।
बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी आरआर स्वैन, एडीजीपी, कानून एवं व्यवस्था विजय कुमार, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मंदीप कुमार भंडारी, संभागीय आयुक्त कश्मीर विजय कुमार विर्दी, प्रशासनिक सचिव, उपायुक्त, विभागाध्यक्ष तथा सिविल एवं पुलिस प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस बार मुहर्रम सात जुलाई को मनाया जाएगा। मुहर्रम गम और मातम का महीना है, जिसे इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग मनाते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, मुहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। यानी मुहर्रम इस्लाम के नए साल या हिजरी सन् का शुरुआती महीना है। मुहर्रम बकरीद के पर्व के 20 दिनों के बाद मनाया जाता है।
इस्लाम धर्म के लोगों के लिए यह महीना बहुत अहम होता है, क्योंकि इसी महीने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। हजरत इमाम हुसैन इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। उनकी शहादत की याद में मुहर्रम के महीने के दसवें दिन को लोग मातम के तौर पर मनाते हैं, जिसे आशूरा भी कहा जाता है।