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जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग करने पर बंटे कानूनविद्

Tue, 15 Mar 2016 11:35 AM IST
एजेंसी/श्रीनगर
एजेंसी/श्रीनगर Updated Tue, 15 Mar 2016 11:35 AM IST
सार

  • राज्यपाल को लोकप्रिय सरकार न बनने की स्थिति में नौ अप्रैल तक विधानसभा भंग करनी होगी।
  • छह महीने की अवधि विधानसभा के आखिरी सत्र की अवधि से शुरू होती है। 

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legal experts divided over assembly dissolution
- फोटो : FILE

विस्तार

रियासत में सरकार गठन पर गतिरोध के बीच विधानसभा भंग किए जाने पर कानूनविद् बंटे हुए हैं। कुछ की राय है कि विधानसभा के आखिरी सत्र से छह महीने की अवधि के बाद विधानसभा भंग कर दी जानी चाहिए। यह तिथि नौ अप्रैल को पूरी होगी। विधानसभा की आखिरी बैठक 10 अक्टूबर को हुई थी। 

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पूर्व एडवोकेट जनरल अल्ताफ नायक का का कहना है कि राज्य के संविधान के अनुसार राज्यपाल को लोकप्रिय सरकार न बनने की स्थिति में नौ अप्रैल तक विधानसभा भंग करनी होगी। छह महीने की अवधि विधानसभा के आखिरी सत्र की अवधि से शुरू होती है। 
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एक अन्य पूर्व एडवोकेट जनरल इशाक कादिरी तथा पूर्व असिस्टेंट सालिसिटर जनरल आफ इंडिया अनिल भान की राय अलग है। उनका कहना है कि राज्यपाल शासन लागू होने की तिथि से छह महीने के बाद ही विधानसभा भंग की जा सकती है। 
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राज्यपाल शासन आठ जनवरी को लागू हुआ था। उनका कहना है कि आठ जनवरी से ही छह महीने की तिथि को माना जाना चाहिए। यदि विधानसभा भंग होती है तो नए सिरे से चुनाव कराना होगा। 

legal experts divided over assembly dissolution
अदालत - फोटो : file
हालांकि, जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार राज्यपाल विधानसभा भंग करने के लिए तब बाध्य होंगे जब विधानसभा के आखिरी सत्र और अगले सत्र की पहली बैठक की अवधि में छह महीने का अंतर हो। इस आधार पर नौ अप्रैल पीडीपी और भाजपा के लिए कटआफ तिथि होगी या फिर दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार बनानी होगी। 

अनुच्छेद 53 के सब सेक्शन (1) के अनुसार राज्यपाल समय-समय पर विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी करते हैं, लेकिन, छह महीने की अवधि एक सत्र की आखिरी बैठक और नए सत्र की पहली बैठक से अधिक नहीं होनी चाहिए। 

अनुच्छेद 92 के सब सेक्शन (3) के अनुसार राज्यपाल शासन लागू होने की तिथि से छह महीने तक प्रभावी रहेगा। इस आधार पर सात जुलाई को राज्यपाल शासन की अवधि समाप्त होनी है। 
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