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सेना भी हुई उसकी बहादुरी की कायल
Updated Wed, 10 Dec 2014 10:38 AM IST
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वेस्टन कमांड के कमांडेंट केवी सिंह ने पिपडी चाढ़का कलां के एक युवक को कठार कांड में प्रथम सूचना देकर अहम किरदार निभाने पर प्रशंसा पत्र और इनाम की राशि का चेक देकर सम्मानित किया। वहीं 27 वर्षीय इस युवक की पहचान छुपाने के लिए जागरूक हिन्दुस्तानी नाम रखा गया।
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कमांडेंट ने बताया कि अगर यह युवक समय रहते सेना को सूचित न करता तो चारों आतंकी सुरक्षा बांध को पार कर देश के किसी भी कोने में भारी तबाही मचा सकते थे।
इससे पहले उन्होंने कठार कंपाउंड के घटनास्थल का दौरा कर पास के गांवों कठार, अला व पिपड़ी चाढ़का कलां के लोगों से मुलाकात की। इसके अलावा पिपड़ी चाढ़का कलां गांव में सेना द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में तीनों गांवों के सरपंचों के अलावा कई लोग मौजूद थे।
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जागरूक हिंदुस्तानी को टेरीटोरियल आर्मी (टीए) में भर्ती करवाया
कमांडेंट ने कहा कि पांच नागरिकों और तीन सुरक्षा कर्मियों का हालांकि शहीद होना भी हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान है मगर अपनी जान पर खेल कर युवक ने फौरन खेत में बैठे इन चार आतंकियों के बारे में सूचना दी उससे पूरे देश में होने वाले नुकसान को बचा कर सच्चा हिंदुस्तानी होने का फर्ज अदा किया। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि जल्द ही इस जागरूक हिंदुस्तानी को टेरीटोरियल आर्मी (टीए) में भर्ती करवाया जाए।
वहीं अला पंचायत के सरपंच चौधरी बलवीर ने इस कांड में शहीद हुए गांव के दोनों युवकों के परिवार का दर्द बयां करते हुए बताया कि विकास और राकेश नामक दोनों शहीदों की शादी मात्र दो से चार वर्ष पहले ही हुई थी एक का दो साल का बच्चा है तो दूसरे का मात्र दो माह का। अंतिम संस्कार के समय दी गई मदद पर्याप्त नहीं है।
दोनों परिवारों का पालन पोषण करने के लिए जितनी भी सहायता की जाए कम है, क्योंकि दुनियां में उन दोनों युवकों का रिक्त स्थान कोई भी नहीं भर सकता। फिर भी पीछे रहने वाले परिवार को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए ताकि अपने जीवन व्यतीत कर सके।
वहीं अला पंचायत के सरपंच चौधरी बलवीर ने इस कांड में शहीद हुए गांव के दोनों युवकों के परिवार का दर्द बयां करते हुए बताया कि विकास और राकेश नामक दोनों शहीदों की शादी मात्र दो से चार वर्ष पहले ही हुई थी एक का दो साल का बच्चा है तो दूसरे का मात्र दो माह का। अंतिम संस्कार के समय दी गई मदद पर्याप्त नहीं है।
दोनों परिवारों का पालन पोषण करने के लिए जितनी भी सहायता की जाए कम है, क्योंकि दुनियां में उन दोनों युवकों का रिक्त स्थान कोई भी नहीं भर सकता। फिर भी पीछे रहने वाले परिवार को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए ताकि अपने जीवन व्यतीत कर सके।