लद्दाख को डीजीपी का पद, इनको मिल सकती है जिम्मेदारी, जम्मू-कश्मीर पुलिस में बदलाव के आसार कम
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट के लागू होते ही दो केंद्र शासित प्रदेशों में बंट सकता है पुलिस महकमा
- यूटी के लिए पुलिस विभाग का स्वरूप तैयार कर रही कमेटी, 15 तक सौंपी जा सकती है रिपोर्ट
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट को 31 अक्तूबर से लागू करने की तैयारियां चल रही हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस का अमला भी पुनर्गठन के साथ नई शक्ल अख्तियार करेगा। पुलिस महकमे के स्वरूप को दो केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में बांटने की कवायद में लद्दाख को डीजीपी पद मिलने की संभावना है।
हालांकि जम्मू-कश्मीर में पदनाम, अफसर और नफरी के पैमाने में ज्यादा अंतर आने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। विभाग के पुनर्गठन की रिपोर्ट तैयार की जा रही है जिसे 15 अक्तूबर तक गृह मंत्रालय को सौंपा जा सकता है। संभव है इसी रिपोर्ट के आधार पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस का ढांचा लागू कर दिया जाए।
महकमे को दो यूटी में बांटने का मसौदा तैयार करने की कवायद में शामिल सूत्रों की मानें तो लद्दाख में डीजीपी पद का सृजन किया जा सकता है। शुरुआती तौर पर यह पद किसी जम्मू-कश्मीर पुलिस के किसी एडीजी या फिर आईजी रैंक के अफसर को भी दिया जा सकता है। वर्तमान में लद्दाख में तैनात पुलिस अफसर और नफरी कश्मीर जोन के तहत आते हैं। पुनर्गठन एक्ट लागू होते ही लद्दाख को यूटी के तहत अलग से महकमा दिए जाने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार यूटी में पुलिस महकमे के अफसर और कर्मचारियों की तैनाती में वर्तमान में तैनात अमले को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके लिए सरकार ने लद्दाख पुलिस में जाने के इच्छुक मुलाजिमों की सूची भी मांग ली है। वहीं, जम्मू कश्मीर पुलिस की व्यवस्था भी मौजूदा मैन पावर के सहारे ही चलाने की कोशिश रहेगी। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव ज्ञानेश्वर शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पुलिस महकमे से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है।
लद्दाख में हो सकते हैं 2500 पुलिसकर्मी
वर्तमान में जम्मू कश्मीर पुलिस के पास 83 हजार पुलिस कर्मी हैं। कुल मंजूर पद 90 हजार हैं। 83 हजार की संख्या में लद्दाख खित्ते से 2 हजार कर्मी हैं। सूत्रों का कहना है कि लद्दाख में ज्यादा से ज्यादा 2500 पुलिस कर्मी रहेंगे। इनमें एक डीजीपी का पद हो सकता है। इसके अलावा मौजूदा समय में लद्दाख में दो जिले हैं। कारगिल और लेह जिलों में पहले से ही एसएसपी हैं। यदि कोई और जिला बनता है तो जरूरत के अनुसार एसएसपी पद का सृजन किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर लद्दाख में एक नई बटालियन खड़ी की जा सकती है। उधर, जम्मू कश्मीर में भी केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद ज्यादा बदलाव होने के आसार कम हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस की मौजूदा संख्या के दम पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली रह सकती है।
...तो टी नामगयाल बन सकते हैं पहले मुखिया
यूटी बनने पर लद्दाख पुलिस का मुखिया कौन होगा, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है। पुनर्गठन एक्ट के लागू होने पर लद्दाख को अलग डीजीपी मिलने के आसार हैं। ऐसे में आईपीएस कैडर के स्थानीय अफसर को भी तरजीह मिल सकती है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) में तैनात जम्मू कश्मीर पुलिस कैडर के आईजी रैंक के आईपीएस अफसर टी नामगयाल लद्दाख के ही रहने वाले हैं। लोकल पुलिस को यदि स्थानीय मुखिया देने पर राय बनती है तो नामग्याल का नाम सबसे ऊपर हो सकता है। 1994 बैच के नामगयाल लद्दाख से हैं। इस समय एसपीजी में तैनात हैं। इनके अलावा जम्मू कश्मीर आईपीएस कैडर के कई अन्य सीनियर अधिकारी भी हैं। इनमें 1986 बैच के नवीन अग्रवाल, 1987 बैच के वी के सिंह, 1987 बैच के एस एम सहाय, 1989 बैच के लालतेंदु मोहंती शामिल हैं। इनमें से भी कोई अधिकारी डीजीपी हो सकता है।अहम बातें
- जम्मू कश्मीर पुलिस के पास मंजूर पद 90 हजार
- मौजूद संख्या 83 हजार, 8500 कर्मियों की नई भर्ती होगी
- 2 हजार के लगभग लद्दाखी पुलिसकर्मी एवं अफसर
- लद्दाख में कुल 2500 पुलिस कर्मियों की पड़ सकती है जरूरत
- दोनों जगहों पर डीजीपी का पद हो सकता है, कमिश्नर की संभावना नहीं
- लद्दाख पुलिस में जाने वालों की इच्छा जानी गई, प्रेफरेंस मांगी गई
- लद्दाख पुलिस में एक बटालियन की अतिरिक्त भर्ती की जा सकती है