लद्दाख से भी उठी पूर्ण राज्य की मांग: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी से मिले नेता
जम्मू-कश्मीर की तरह लद्दाख के नेताओं की मांग है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। ज्ञात हो कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पुनर्गनठन हुआ है।
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लद्दाखी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर लद्दाख को मुकम्मल राज्य बनाने की मांग उठाई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी से लद्दाख के नेताओं की अपनी तरह की इस पहली बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश के कारगिल जिले के ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत को सकारात्मक करार देकर कहा कि उन्हें आश्वस्त किया गया है कि लद्दाख को राज्य बनाने की मांग गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के समक्ष रखी जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में सिविल सोसायटी और राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे। कांग्रेस पार्टी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के नेता असगर अली करबलाई ने कहा कि लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने की मांग उठाई गई है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने गंभीरता से सुना है। इस तरह की यह पहली बैठक थी, जिसमें उठाए गए मुद्दों को गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के समक्ष रखने का आश्वासन दिया गया है।
करबलाई ने कहा कि रेड्डी ने उन्हें कहा है कि केंद्र लद्दाख के विकास को लेकर बेहद गंभीर है। जल्द ही वे खुद लद्दाख का दौरा करेंगे। उन्हें बातचीत के लिए फिर बुलाया जाएगा लेकिन इसकी तारीख नहीं बताई गई है। इस मामले में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद निश्चित रूप से कुछ सकारात्मक होगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल बशीर अहमद शाकिर ने कहा कि गृह राज्य मंत्री ने एक और बैठक की बात कही है। उम्मीद है कि इस मामले पर बात आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने के बाद से रोजगार समेत अन्य विशेषाधिकार खत्म होने से लोग बेहद चिंतित हैं। गौरतलब है कि इससे पूर्व केेंद्र की जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक हुई थी।
आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा की उपस्थिति में 6 से 9 जुलाई तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का निर्णय लिया है। आयोग इस अवधि के दौरान राजनीतिक दलों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों और प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारियों से मिलेगा। 20 जिलों के उपायुक्तों सहित केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करके प्रत्यक्ष सूचना हासिल करेगा। साथ ही जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के अंतर्गत परिसीमन प्रक्रिया से संबंधित इनपुट प्राप्त करेगा।
आयोग दो-दो दिन जम्मू और कश्मीर में रहेगा
आयोग अपने चार दिवसीय दौरे के तहत दो-दो दिन जम्मू और कश्मीर में रहेगा। छह जुलाई को श्रीनगर पहुंचकर दल नुमाइंदों से बात करेगा। अगले दिन सात जुलाई को पहलगाम जाएगा। जम्मू संभाग के दौरे पर यह दल आठ जुलाई को किश्तवाड़ और नौ जुलाई को जम्मू में रहेगा।
आयोग का एक साल बढ़ा है कार्यकाल
परिसीमन आयोग का गठन मार्च 2020 में किया गया था। कोरोना महामारी को देखते हुए इसका कार्यकाल मार्च 2021 में एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के निर्वाचन आयुक्त आयोग के तीसरे सदस्य हैं। आयोग में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत पांच एसोसिएट सदस्य भी हैं। इससे पहले आयोग ने बातचीत के लिए फरवरी में एसोसिएट सदस्यों को आमंत्रित किया था जिसमें दो एसोसिएट सदस्य भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा शामिल हुए थे। नेकां के तीन सांसद बैठक में उपस्थित नहीं हुए। संकेत हैं कि अगली बैठक में नेकां के नुमाइंदे भी शामिल हो सकते हैं।
आयोग को मिले प्रतिवेदन का लिया संज्ञान
आयोग ने जनगणना 2011 से संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के आंकड़ों, मानचित्र से संबंधित कई बैठकें पहले ही की थीं। परिसीमन से संबंधित सिविल सोसायटी, केंद्र शासित प्रदेश के सार्वजनिक सदस्यों से अनेक प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं। आयोग ने ऐसे सभी सुझावों को संज्ञान में लिया है और निर्देश दिया है कि परिसीमन से संबंधित जमीनी वास्तविकताओं के संदर्भ में इन सुझावों पर आगे विचार किया जा सकता है। आयोग को आशा है कि सभी हितधारक इस प्रयास में सहयोग करेंगे और बहुमूल्य सुझाव देंगे।
आयोग जल्द करना चाहता है परिसीमन
सूत्रों के मुताबिक 90 सीटों के लिए आयोग जल्दी ही परिसीमन तय करना चाहता है। सात सीटें बढ़नी हैं। पहले 83 सीटें (लद्दाख की चार सीटों को छोड़कर) थीं। इस दौरान यह चर्चा भी होगी कि किन क्षेत्रों को हटाया जाए और किसे शामिल किया जाए। आरक्षित सीटों पर भी विचार-विमर्श होगा। 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लिए खाली रखी जाएंगी। पहली बार परिसीमन आयोग बाकी प्रदेशों की तरह ही अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित सीटें भी घोषित करेगा।
1995 में तय हुआ था परिसीमन
जम्मू-कश्मीर में 1995 में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन 1981 की आबादी के आधार पर किया गया था। इसके बाद साल 2001 में परिसीमन होना था जिसे 2006 तक टाल दिया गया था। पिछले साल अगस्त में विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद नए परिसीमन का रास्ता साफ हो गया। प्रदेश में नए सिरे से परिसीमन को लेकर आयोग लगातार बैठकें कर रहा है।