{"_id":"64386ba35599fec07e010859","slug":"lack-of-medicine-in-hospitals-jammu-news-c-10-jam1006-91700-2023-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: अस्पतालों में सीरम की कमी से मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: अस्पतालों में सीरम की कमी से मरीज परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भीषण गर्मी के कारण कुत्ते व बंदर के हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी चिकित्सा केंद्रों में सीरम की कमी से मरीज परेशान हैं। अधिकांश जगहों पर केवल वैक्सीन उपलब्ध है। प्रमुख अस्पतालों के हालात भी खराब है। इस कारण जिला और शहर के आसपास क्षेत्रों से पीड़ित जीएमसी जम्मू के रैबीज सेक्शन में आ रहे हैं।
कुत्ते के काटने पर खून का रिसाव होने के बाद जख्म वाले स्थान पर सीरम के साथ एंटी रैबीज वैक्सीन दी जाती है। मगर बड़ी संख्या में केंद्रों पर सीरम की उपलब्धता नहीं है। सरवाल और गांधी नगर अस्पताल से भी रेफर होकर मरीज जीएमसी में आ रहे हैं। जानीपुर वासी रोहित शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में कुत्ते ने काट लिया था, वह सरवाल अस्पताल में गए, वहां सिरम न होने के कारण जीएमसी जम्मू आना पड़ा। इसी तरह गांधीनगर से भी लोग पहुंच रहे हैं। नानक नगर वासी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि स्थानीय चिकित्सा केंद्र में सीरम नहीं मिला।
जीएमसी के रैबीज सेक्शन में रोजाना 150 मरीज रिपोर्ट
प्रमुख बाजारों में सीरम की एक वायल 400 से 500 रुपये में मिलती है। जीएमसी के रैबीज सेक्शन में रोजाना औसतन 130 से 150 डॉग सहित अन्य जानवरों की बाइट के मामले आ रहे हैं। तीसरी श्रेणी के मामलों में लगभग पीड़ितों को सीरम लगाया जाता है, जो वायरस को नसों के माध्यम से दिमाग तक जाने से रोकता है। स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोलर स्टोर डॉ. रितेश खुल्लर के अनुसार जरूरत के मुताबिक सभी चिकित्सा केंद्रों में सीरम उपलब्ध करवाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। भीषण गर्मी के कारण कुत्ते व बंदर के हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी चिकित्सा केंद्रों में सीरम की कमी से मरीज परेशान हैं। अधिकांश जगहों पर केवल वैक्सीन उपलब्ध है। प्रमुख अस्पतालों के हालात भी खराब है। इस कारण जिला और शहर के आसपास क्षेत्रों से पीड़ित जीएमसी जम्मू के रैबीज सेक्शन में आ रहे हैं।
कुत्ते के काटने पर खून का रिसाव होने के बाद जख्म वाले स्थान पर सीरम के साथ एंटी रैबीज वैक्सीन दी जाती है। मगर बड़ी संख्या में केंद्रों पर सीरम की उपलब्धता नहीं है। सरवाल और गांधी नगर अस्पताल से भी रेफर होकर मरीज जीएमसी में आ रहे हैं। जानीपुर वासी रोहित शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में कुत्ते ने काट लिया था, वह सरवाल अस्पताल में गए, वहां सिरम न होने के कारण जीएमसी जम्मू आना पड़ा। इसी तरह गांधीनगर से भी लोग पहुंच रहे हैं। नानक नगर वासी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि स्थानीय चिकित्सा केंद्र में सीरम नहीं मिला।
विज्ञापन
जीएमसी के रैबीज सेक्शन में रोजाना 150 मरीज रिपोर्ट
प्रमुख बाजारों में सीरम की एक वायल 400 से 500 रुपये में मिलती है। जीएमसी के रैबीज सेक्शन में रोजाना औसतन 130 से 150 डॉग सहित अन्य जानवरों की बाइट के मामले आ रहे हैं। तीसरी श्रेणी के मामलों में लगभग पीड़ितों को सीरम लगाया जाता है, जो वायरस को नसों के माध्यम से दिमाग तक जाने से रोकता है। स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोलर स्टोर डॉ. रितेश खुल्लर के अनुसार जरूरत के मुताबिक सभी चिकित्सा केंद्रों में सीरम उपलब्ध करवाया है।
विज्ञापन