तीन गुना हमलावरों से भिड़े बिहारी सैनिक, होश उड़ा देने वाली है गलवां घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर 15 जून रात की पूरी कहानी
- होश उड़ा देने वाली है गलवां घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर 15 जून रात की पूरी कहानी
- कर्नल संतोष बाबू की शहादत पर चीन के 350 सैनिकों पर कहर बनकर टूटे थे सौ जांबाज
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गलवां घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर 20 सैनिकों की शहादत की पूरी कहानी सुनकर किसी भी भारतीय का सीना चौड़ा हो जाएगा। अपने सैनिकों के मारे जाने की खबर को दबाते आ रहे चीन को उस रात 16 बिहार रेजिमेंट के हाथों कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था।
16 बिहार रेजिमेंट की पहली टुकड़ी पर जब चीन के सैनिकों ने हमला किया तो कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू की शहादत ने बाकी जवानों को आपे से बाहर कर दिया। भारतीय सेना के करीब 100 जांबाजों ने चीन के 350 सैनिकों पर ऐसा धावा बोला कि हर तरफ लाशें बिछने लगीं। पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर चीन के तंबुओं को उखाड़ दिया गया।
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सैन्य सूत्रों ने बताया कि 15 जून को श्योक और गलवां नदी के संगम स्थल के पास 3 इनफ्रैंट्री डिवीजन कमांडर और अन्य अफसर मौजूद थे। दोनों देशों में बातचीत चल रही थी। 16 बिहार रेजिमेंट से कहा गया कि वह सुनिश्चित करें कि समझौते के तहत चीन के सैनिक अपनी पोस्ट हटा लें। इसके लिए चीन की ऑब्जरवेशन पोस्ट पर जाकर भारतीय सैनिकों ने तंबू हटाने को कहा। उस समय चीन के दर्जन भर सैनिक मौजूद थे। चीनी सैनिकों ने पोस्ट हटाने से इनकार कर दिया। बिहार रेजिमेंट की टुकड़ी लौट आई।
हवलदार पलनी पर हुआ था पहला वार
इसके बाद कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में 50 सैनिकों की टुकड़ी मौके पर पहुंची और पोस्ट हटाने की बात दोहराई, लेकिन तब तक चीन के लगभग 350 सैनिक हथियारों से लैस होकर हमले की तैयार कर चुके थे। बिहार रेजिमेंट के जवानों के पहुंचते ही पहाड़ से पत्थर और सामने से चीनी सैनिकों ने कंटीले तार और कील लगे डंडों और रॉड से हमला कर दिया। पहला वार हवलदार पलनी पर हुआ। कर्नल संतोष बाबू भी प्रहार से गिर पड़े। इतने में करीब 50 और भारतीय सैनिकों ने मौके पर पहुंचकर चीनी सैनिकों पर जबरदस्त जवाबी हमला किया।
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तीन घंटे चली इस हिंसक झड़प में बड़ी तादाद में चीनी सैनिक लहूलुहान होकर नीचे गिर चुके थे। इनमें से कई की मौत हो चुकी थी। बिहार रेजिमेंट की टुकड़ी ने चीन के तंबू उखाड़ कर पोस्ट ध्वस्त कर दी। इसके बाद दोनों तरफ के सीनियर अफसरों में बातचीत चली। सैन्य सूत्रों के अनुसार 16 जून की सुबह चीनी सैनिकों के शव और घायल सैनिकों को भारतीय सेना की ओर से लौटाया गया।