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Jammu News: युवाओं ने खूब लड़ाए पेच पतंगों से पटा आसमान
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- जम्मू पतंग उत्सव में शुभांग सेठी ने मारी बाजी, हिमांशु ने दूसरा और कुनाल ने जीता तीसरा पुरस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर बुधवार को बाहु रोपवे स्टेशन में हुए जम्मू पतंग उत्सव के दौरान रंगबिरंगी पतंगों से आसमान रंगीन नजर आया। प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटने पर चल गइया... के साथ उसे हार का अहसास कराया गया। पर्यटन निदेशालय जम्मू की ओर से करवाए गए उत्सव में सौ प्रतिभागियों ने शिरकत कर पतंगबाजी में जोश दिखाया। इसमें शानदार प्रदर्शन करने के लिए शुभांग सेठी को पहले पुरस्कार के रूप में 3000 रुपये, हिमांशु गुप्ता और कुनाल गोरिया को क्रमश: दूसरे व तीसरे पुरस्कार में 2000 व 1000 रुपये नकद राशि से सम्मानित किया गया। पतंगबाजी करने पहुंचे प्रतिभागियों ने जम्मू रोपवे में सूर्यपुत्री तवी नदी के विहंगम दृश्यों को भी निहारा।
डीसी सचिन कुमार वैश्य ने पहली पतंग उड़ाकर उत्सव की शुरुआत की। उनके साथ पर्यटन निदेशक जम्मू विवेकानंद राय, संयुक्त पर्यटन निदेशक सुनैना शर्मा मेहता भी उपस्थित रहीं। डीसी ने कहा कि आज पतंग उड़ाने से बचपन की यादें ताजा हो गईं। यह हमारी संस्कृति से जुड़ी परंपरा है। पर्यटन निदेशक ने इस उत्सव में जम्मू के लोगों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया और भारतीय धागे से पतंग उड़ाने की प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। मौके पर पर्यटन उपनिदेशक अब्दुल जब्बार, सुगंधी बनोत्रा, आरिफ लोन, कैप्टन अनिल गौड़ भी मौजूद रहे।
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तीर्थस्थलों का प्रचार
संयुक्त पर्यटन निदेशक सुनैना ने कहा कि जम्मू में तीर्थयात्रा सर्किट के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में रघुनाथ मंदिर, श्री रणबीरेश्वर मंदिर, बावे वाली माता मंदिर, मोहमाया मंदिर, हरकी पौड़ी मंदिर, पीरखो और श्री वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर शामिल हैं। ये आध्यात्मिक स्थल जम्मू की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं और समग्र पर्यटन अनुभव में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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आज भी शहर में पतंगबाजी की रहेगी धूम
जम्मू। जन्माष्टमी पर वीरवार को शहर भर में पतंगबाजी की धूम रहेगी। लगभग हर छत पर पतंगबाजी के शौकीन नजर आएंगे। पतंगबाजी के दौरान प्रतिबंधित गट्टू डोर का भी खुलकर इस्तेमाल होता रहा है। रक्षाबंधन पर भी गट्टू डोर से कई लोग घायल हुए थे। इससे एक पुलिसकर्मी के गले पर गहरे घाव हुए थे। पुलिस और प्रशासन के दावों के बावजूद गट्टू डोर के प्रयोग को कम नहीं किया जा सका है। यह बाजार में अधिकांश जगह उपलब्ध होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर बुधवार को बाहु रोपवे स्टेशन में हुए जम्मू पतंग उत्सव के दौरान रंगबिरंगी पतंगों से आसमान रंगीन नजर आया। प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटने पर चल गइया... के साथ उसे हार का अहसास कराया गया। पर्यटन निदेशालय जम्मू की ओर से करवाए गए उत्सव में सौ प्रतिभागियों ने शिरकत कर पतंगबाजी में जोश दिखाया। इसमें शानदार प्रदर्शन करने के लिए शुभांग सेठी को पहले पुरस्कार के रूप में 3000 रुपये, हिमांशु गुप्ता और कुनाल गोरिया को क्रमश: दूसरे व तीसरे पुरस्कार में 2000 व 1000 रुपये नकद राशि से सम्मानित किया गया। पतंगबाजी करने पहुंचे प्रतिभागियों ने जम्मू रोपवे में सूर्यपुत्री तवी नदी के विहंगम दृश्यों को भी निहारा।
डीसी सचिन कुमार वैश्य ने पहली पतंग उड़ाकर उत्सव की शुरुआत की। उनके साथ पर्यटन निदेशक जम्मू विवेकानंद राय, संयुक्त पर्यटन निदेशक सुनैना शर्मा मेहता भी उपस्थित रहीं। डीसी ने कहा कि आज पतंग उड़ाने से बचपन की यादें ताजा हो गईं। यह हमारी संस्कृति से जुड़ी परंपरा है। पर्यटन निदेशक ने इस उत्सव में जम्मू के लोगों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया और भारतीय धागे से पतंग उड़ाने की प्रतिबद्धता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। मौके पर पर्यटन उपनिदेशक अब्दुल जब्बार, सुगंधी बनोत्रा, आरिफ लोन, कैप्टन अनिल गौड़ भी मौजूद रहे।
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तीर्थस्थलों का प्रचार
संयुक्त पर्यटन निदेशक सुनैना ने कहा कि जम्मू में तीर्थयात्रा सर्किट के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में रघुनाथ मंदिर, श्री रणबीरेश्वर मंदिर, बावे वाली माता मंदिर, मोहमाया मंदिर, हरकी पौड़ी मंदिर, पीरखो और श्री वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर शामिल हैं। ये आध्यात्मिक स्थल जम्मू की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं और समग्र पर्यटन अनुभव में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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आज भी शहर में पतंगबाजी की रहेगी धूम
जम्मू। जन्माष्टमी पर वीरवार को शहर भर में पतंगबाजी की धूम रहेगी। लगभग हर छत पर पतंगबाजी के शौकीन नजर आएंगे। पतंगबाजी के दौरान प्रतिबंधित गट्टू डोर का भी खुलकर इस्तेमाल होता रहा है। रक्षाबंधन पर भी गट्टू डोर से कई लोग घायल हुए थे। इससे एक पुलिसकर्मी के गले पर गहरे घाव हुए थे। पुलिस और प्रशासन के दावों के बावजूद गट्टू डोर के प्रयोग को कम नहीं किया जा सका है। यह बाजार में अधिकांश जगह उपलब्ध होती है।