कश्मीर में इसलिए की जा रही हैं आतंकियों की हत्याएं
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को उत्तरी कश्मीर के पट्टन और टंगमर्ग में इस महीने हुई हत्याओं का खुलासा करते हुए कहा कि तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि इन हत्याओं के पीछे गुटों के बीच आपसी रंजिश है।
गौरतलब है कि 14 सितंबर को पट्टन के डांगरपुरा इलाके में एक सेब के बगीचे से गोलियों से छलनी तीन शव पाए गए थे, जिनकी शिनाख्त पुलिस ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम के आतंकियों के तौर पर की थी।
मृतकों में सोपोर के आमिर रेशी, लोलीपुरा पट्टन के आशिक हुसैन और बटपुरा सोपोर के नवीद अहमद थे। वहीं इस घटना के चार दिन बाद टंगमर्ग के कुंजर इलाके के देवबुग गांव में धान के खेत से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी फैयाज अहमद भट का शव बरामद हुआ था।
वह पट्टन का रहने वाला था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के नार्थ जोन के डीआईजी गरीब दास ने बताया कि तफ्तीश में सामने आया है कि हिजबुल आतंकियों द्वारा आमिर रेशी, आशिकहुसैन और नवीद की हत्या की थी।
यह तीनों युवक अब्दुल कयूम नजार के नेतृत्व वाले लश्कर-ए-इस्लाम आतंकी संगठन के थे, जो हिज्ब से अलग होकर गठित किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले उनका शारीरिक उत्पीड़न किया गया फिर उन्हें मौत के घाट उतारा गया।
हत्याएं आपसी रंजिश का मामला
डीआईजी दास ने बताया कि बदले की भावना के साथ लश्कर-ए-इस्लाम के आतंकियों द्वारा हिज्ब के टॉप आतंकी को टंगमर्ग में मार गिराया। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि यह आपसी रंजिश का मामला था, लेकिन सोपोर में बेरहमी से मारे गए बुरहान और उसके पिता के हत्या आरोपियों का पता लगाना बड़ी चुनौती थी।
डीआईजी ने बताया कि पुलिस द्वारा पट्टन और तंगमर्ग हत्याओं के जिम्मेदार हिज्ब और लश्कर-ए-इस्लाम के आतंकियों की पहचान हो चुकी है। दो विभिन्न एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्हें दबोचने पर उनके खिलाफ चार्ज शीट पेश की जाएगी।
बताया कि बुरहान और उसके पिता की हत्या मामले को दो लोगों ने अंजाम दिया है। वह लश्कर-ए-तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) हैं। हमले में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल की भी पहचान हो चुकी है। लेकिन पहली प्राथमिकता है हत्या आरोपियों को पकड़ना।