गोलाबारी के डर से मंत्री जी नहीं गए सीमांत गांवों में
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पाकिस्तानी गोलाबारी से तबाह हुए गांवों के लोग इंतजार ही करते रह गए लेकिन उन्हें गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू के दीदार नहीं हो सके। सीमांत ग्रामीणों को उम्मीद थी कि किचलू उनसे मिलकर दर्द बांटेंगे लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
पिछले कुछ दिनों से भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार गोलाबारी और शनिवार को दो ग्रामीणों की मौत से सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीण दहशतजदा हैं। अब उनमें इस बात को लेकर रोष है कि किचलू न तो सीमावर्ती गांव गए और न ही गोलाबारी में मारे गए लोगों के घर पहुंचे।
मंत्री साहब अपने काफिले के साथ आरएस पुरा तहसील दफ्तर पहुंचे। वहां उन्होंने गोलाबारी में मारे गए लोगों के परिवार को बुलाया और वहीं उन्हें मदद का चेक भेंट किया।
गांव के लोगों का कहना है कि गृह राज्य मंत्री को घटनास्थल का जायजा लेना चाहिए था, ताकि उन्हें सीमांत गांवों के लोगों का दर्द पता चलता। साथ ही वे गोलाबारी के बीच किस तरह अपने परिवार को लेकर रह रहे हैं, इसका भी उन्हें अहसास होता।
खेल मंत्री रमण भल्ला सीमावर्ती इलाकों में पहुंचे
हालांकि इस मामले में आवास व खेल मंत्री रमण भल्ला सीमावर्ती इलाकों में पहुंचे और लोगों से हालचाल पूछा। साथ ही उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन भी दिया।
इसके अलावा वे गांव के बाहरी इलाकों में स्थित शरणार्थी शिविरों में भी पहुंचे और गांवों से पलायन कर पहुंचे लोगों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाने के निर्देश दिए। पाक गोलाबारी के बाद अब सीमांत गांवों में नेताओं के दौरे शुरू हो गए हैं।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री चौधरी गारू राम भी अब्दुल्लियां गांव पहुंचे। रविवार को अन्य दलों के भी कई नेताओं के पहुंचने का कार्यक्रम है। इस मुद्दे पर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस अब भाजपा की केंद्र सरकार के घेर रही है।