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कोरोना संक्रमण से जम्मू संभाग में शुरू नहीं हो पाया किडनी प्रत्यारोपण
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जम्मू। कोरोना संक्रमण की दूसरे मरीजों पर भी मार पड़ी है। जम्मू-कश्मीर मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी मिलने के बावजूद जम्मू संभाग में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। कोरोना प्रसार को देखते हुए इस साल भी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो पाना मुश्किल लग रहा है। नतीजतन किडनी पीड़ितों को प्रत्यारोपण के लिए जालंधर, लुधियाना, दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों में जाना पड़ रहा है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दो वर्षों से किडनी प्रत्यारोपण की कवायद चल रही है। अस्पताल के नेफरोलाजी यूनिट को अपग्रेड करने के साथ अन्य संबंधित कई यूनिटों का विस्तार किया गया है। पूर्व गठबंधन सरकार ने जुलाई 2018 में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी। इसके लिए जीएमसी फैकल्टी सदस्यों की कमेटी गठित की गई। कमेटी ने रिपोर्ट भी दी, लेकिन पूर्व सरकार के जाने के बाद कुछ खास नहीं हो पाया। फैकल्टी सदस्यों की कमेटी में शामिल रहे नेफरोलॉजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. एसके बाली ने बताया कि प्रत्यारोपण सुविधा के लिए रिपोर्ट तैयार करके दी गई थी, लेकिन उसे गति नहीं मिल पाई।
हर साल दो हजार किडनी के नए मरीज
जम्मू। जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से हर साल किडनी के दो हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं। ये मरीज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलिसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है। लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। किडनी रोगों के लिए मधुमेह, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), नियमित दर्द निवारक व एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना मुख्य कारण रहा है।
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कोरोना की वजह से उपकरणों की खरीद लटकी : प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. नसीब चंद डींगरा के अनुसार सुपर स्पेशलिटी में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा को शुरू करने की प्रक्रिया पर काम हो रहा है, लेकिन कोरोना संकट के चलते जरूरी उपकरणों की खरीद लटकी है। प्रत्यारोपण के लाइसेंस के लिए भी आवेदन किया गया है।
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में दो वर्षों से किडनी प्रत्यारोपण की कवायद चल रही है। अस्पताल के नेफरोलाजी यूनिट को अपग्रेड करने के साथ अन्य संबंधित कई यूनिटों का विस्तार किया गया है। पूर्व गठबंधन सरकार ने जुलाई 2018 में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी। इसके लिए जीएमसी फैकल्टी सदस्यों की कमेटी गठित की गई। कमेटी ने रिपोर्ट भी दी, लेकिन पूर्व सरकार के जाने के बाद कुछ खास नहीं हो पाया। फैकल्टी सदस्यों की कमेटी में शामिल रहे नेफरोलॉजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. एसके बाली ने बताया कि प्रत्यारोपण सुविधा के लिए रिपोर्ट तैयार करके दी गई थी, लेकिन उसे गति नहीं मिल पाई।
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हर साल दो हजार किडनी के नए मरीज
जम्मू। जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से हर साल किडनी के दो हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं। ये मरीज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलिसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है। लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। किडनी रोगों के लिए मधुमेह, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), नियमित दर्द निवारक व एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना मुख्य कारण रहा है।
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कोरोना की वजह से उपकरणों की खरीद लटकी : प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. नसीब चंद डींगरा के अनुसार सुपर स्पेशलिटी में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा को शुरू करने की प्रक्रिया पर काम हो रहा है, लेकिन कोरोना संकट के चलते जरूरी उपकरणों की खरीद लटकी है। प्रत्यारोपण के लाइसेंस के लिए भी आवेदन किया गया है।