{"_id":"63c8014dc6cd6e2ae468ae22","slug":"katha-organize-in-arniya-rspura-news-c-10-1-26893-2023-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम के चलते गंगा को धरती पर आना पड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम के चलते गंगा को धरती पर आना पड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सुहागपुर गांव में चल रही भागवत चर्चा और प्रभु संकीर्तन में बुधवार को महामंडलेश्वर नंदकिशोर ने संगत को कथा सुनाई। शास्त्री जी ने गंगासागर और जगन्नाथ मंदिर का महत्व बताया। उन्होंने गंगोत्री यमुनोत्री के बारे में संगत को विस्तार से बताया। उन्होंने गंगा मैया को धरती पर बुलाने के लिए कितनी पीढि़यों ने अपना बलिदान दिया, के बारे में विस्तार में बताया।
उन्होंने बताया कि भागीरथ का दृढ़ निश्चय और परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम के चलते गंगा को धरती पर आने के लिए मजबूर कर दिया। इससे पहले भागीरथ की पीढ़ी दर पीढ़ी गंगा मैया को धरती पर बुलाने के लिए तपस्या करती रहीं, लेकिन आखिरकार भागीरथ की तपस्या रंग लाई और गंगा मैया धरती पर आने को मजबूर हो गईं, जिससे सनातन धर्म को मान्यता रखने वाले लोग गंगा नदी में स्नान करने के बाद पुण्य के भागी बनते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान के प्रति अटूट आस्था रंग लाती है। भगवान खुद भक्तों की इच्छा को पूर्ण करते हैं। कथा के समापन पर आरती की गई और संगत में प्रसाद वितरण किया गया।
विज्ञापन
अरनिया। सुहागपुर गांव में चल रही भागवत चर्चा और प्रभु संकीर्तन में बुधवार को महामंडलेश्वर नंदकिशोर ने संगत को कथा सुनाई। शास्त्री जी ने गंगासागर और जगन्नाथ मंदिर का महत्व बताया। उन्होंने गंगोत्री यमुनोत्री के बारे में संगत को विस्तार से बताया। उन्होंने गंगा मैया को धरती पर बुलाने के लिए कितनी पीढि़यों ने अपना बलिदान दिया, के बारे में विस्तार में बताया।
उन्होंने बताया कि भागीरथ का दृढ़ निश्चय और परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम के चलते गंगा को धरती पर आने के लिए मजबूर कर दिया। इससे पहले भागीरथ की पीढ़ी दर पीढ़ी गंगा मैया को धरती पर बुलाने के लिए तपस्या करती रहीं, लेकिन आखिरकार भागीरथ की तपस्या रंग लाई और गंगा मैया धरती पर आने को मजबूर हो गईं, जिससे सनातन धर्म को मान्यता रखने वाले लोग गंगा नदी में स्नान करने के बाद पुण्य के भागी बनते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान के प्रति अटूट आस्था रंग लाती है। भगवान खुद भक्तों की इच्छा को पूर्ण करते हैं। कथा के समापन पर आरती की गई और संगत में प्रसाद वितरण किया गया।
विज्ञापन