मुहिम ‘आखिर कब तक’: अल्पसंख्यकों की हत्या पर कश्मीरी युवाओं ने आतंकियों के खिलाफ बुलंद की आवाज
ऐसा पहली बार देखा गया है कि कश्मीरी युवा घाटी में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। कैंडल मार्च मुहिम को ‘आखिर कब तक’ नाम दिया गया है।
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कश्मीर में आतंकियों की ओर से अल्पसंख्यकों की गई हत्या के विरोध में कश्मीरियों ने आवाज बुलंद कर दी है। घाटी के युवा इन हत्याओं पर आतंकियों के खिलाफ खड़े हुए हैं। हर वर्ग में रोष है। श्रीनगर शहर के लाल चौक में घंटाघर के पास हुई हत्याओं को लेकर युवा कैंडल मार्च के साथ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि आतंकी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर कश्मीर में माहौल बिगाड़ रहे हैं, जो कतई बर्दाश्त नहीं।
स्थानीय युवा एक्टिविस्ट आकिब रेंजू ने बातचीत में बताया कि अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के पीछे पाकिस्तान की कट्टरपंथ मानसिकता है। इस्लाम में लिखा है कि अगर किसी बेगुनाह का कत्ल किया जाता है तो वह पूरी इंसानियत का कत्ल होगा। आकिब ने कहा कि अगर बीते 30 सालों की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हुआ है। कश्मीर का युवा अब समझ चुका है कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा, केवल मासूम मारे जा रहे हैं।
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आकिब के अनुसार अब कश्मीर का युवा आतंकवाद और अन्य गलत कामों से बाहर आना चाहता है और युवा एक्टिविस्ट होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन सबके खिलाफ आवाज उठाएं। पाकिस्तान के नापाक मंसूबों से कश्मीरी युवा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मोहल्ला कमेटियों के साथ बहुसंख्यक समाज के हर वर्ग ने हत्याओं की निंदा की
मोहल्ला कमेटियों के साथ बहुसंख्यक मुस्लिम समाज के हर वर्ग ने इन हत्याओं की निंदा की है। हालांकि ये लोग खुलकर सामने नहीं आए हैं, लेकिन अपने सामाजिक दायरे में हर किसी ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ सहानुभूति जताई है। पीड़ित परिवारों के साथ दुख में शरीक होने के लिए भी उनके पास पहुंच रहे हैं। शायद यही कारण है कि बिंदरू मेडिकेट की दुकान एक बार फिर से परिवार की ओर से खोली गई है।
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कश्मीर हर धर्म के लोगों का है, हम सब भाईचारे के साथ रहेंगे
बिंदरू के ससुर रोशन लाल मावा ने भी कहा कि दामाद की हत्या के बाद उनके परिवार के पास अफसोस करने और उन्हें सहानुभूति देने पहुंचे मुस्लिम समुदाय के लोगों के आश्वासन और प्यार के चलते उन्होंने एक बार फिर से दुकान खोलने का फैसला लिया है। वहीं, प्रिंसिपल सुपिंदर कौर के घर भी मुस्लिम समुदाय के काफी लोग परिवार के साथ संवेदना व्यक्त करने पहुंचे हैं। ग्रैंड मुफ्ती नसीरुल इस्लाम भी उनके घर पहुंचे और इस दरिंदगी की निंदा की। कहा कि कश्मीर हर धर्म के लोगों का है, चाहे वे हिंदू, सिख या मुसलमान हैं और हम सब सदा भाईचारे के साथ रहेंगे।
आतंकियों ने इन वारदातों को दिया अंजाम
बता दें कि पांच अक्तूबर को मक्खन लाल बिंदरू सहित गोलगप्पे वाले वीरेंद्र पासवान और एक सूमो ड्राइवर की हत्या की गई थी। इसके बाद सात अक्तूबर को आतंकियों ने संगम ईदगाह में एक सरकारी स्कूल में घुसकर प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की हत्या कर दी, जिससे अल्पसंख्यकों में डर का माहौल है।