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घाटी के छात्रों की दिनेश्वर से अपील, सर! गन कल्चर की जगह कश्मीर में लाएं बुक कल्चर

Wed, 29 Nov 2017 11:34 AM IST
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय Updated Wed, 29 Nov 2017 11:34 AM IST
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kashmiri students meets to dineshwar sharma in anantnag and apeal  for peace in kashmir
- फोटो : amar ujala
2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद अनंतनाग से हालात खराब हुए थे, मंगलवार को उसी अनंतनाग का केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने दौरा किया। इस दौरान शर्मा के साथ 22 प्रतिनिधिमंडलों ने मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत करवाया।
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वार्ताकार से मिले स्कूल और कालेज के विद्यार्थियों ने घाटी में आए दिन होने वाली पत्थरबाजी और हड़तालों से उनकी पढ़ाई को हो रहे नुकसान से अवगत करवाया। छात्राओें ने कहा कि घाटी में ऐसा माहौल बनाएं कि बंदूक की संस्कृति खत्म हो जाए।
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नेशनल कांफ्रेंस को छोड़कर पीडीपी, भाजपा, कांग्रेस और विस्थापित और गैर विस्थापित कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी वार्ताकार से मुलाकात की।स्कूल और कालेज के छात्र-छात्राओें ने बताया कि उन्होंने वार्ताकार को कश्मीर की समस्या से अवगत करवाया और कहा कि आए दिन कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी और हड़तालों के चलते उनकी शिक्षा बाधित होती है।
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इसकी वजह से उनको अपना भविष्य संवारने में दिक्कतें पेश आतीं हैं। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों पर पत्थरबाजी के आरोप हैं, उन पर दर्ज केस वापस लेकर उन्हें भविष्य बनाने का एक मौका दिया जाए। वार्ताकार ने युवाओं से अपील की कि पत्थरबाजी छोड़ें और घाटी में शांति स्थापित करने में अपना योगदान दें।

कश्मीरी पंडित बोले, हमें कब अच्छी जगह ठहराया जाएगा

विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल संजय पंडित के नेतृत्व में दिनेश्वर शर्मा से मिला और अपनी समस्याएं बताईं। संजय ने कहा कि हालात खराब होने पर जब उन्हें यहां से जाना पड़ा तो उन्हें बुरा लगा था, लेकिन हालात ने मजबूर कर दिया।
अब जब हम वापस आकर विस्थापित शिविरों में रह रहे हैं, तो भी यहां पर कई दिक्कतें पेश आती हैं। हमें सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि उन्हें रहने के लिए अच्छी जगह मिलेगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
उन्हें आज तक अच्छी जगह नहीं ठहराया जा सका। उनके बच्चों को पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर हम सबका है। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी में शामिल युवाओं के के स वापस लेने का फैसला युवाआें के  लिए अच्छा मौका है।

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