कश्मीर के लोग भी केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आ रहे हैं सामने, ऐसे कर रहे मदद
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कश्मीर जो वर्ष 2014 में बाढ़ की पीड़ा सह चुका है, अब केरल के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए उठ खड़ा हुआ है। सिविल सोसाइटी फोरम कश्मीर, टीम रेड, आदि जैसे संस्थानों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भेजने का बीड़ा उठाया है। वहीं जम्मू कश्मीर बैंक ने भी 11 करोड़ देने का फैसला किया है।
श्रीनगर के सोनवार इलाके में सिविल सोसाइटी फोरम कश्मीर द्वारा केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री इक्कठा कर उसे आगे भेजने के लिए पैकेजिंग की गयी। करीब दो हजार से अधिक परिवारों के लिए खाने-पीने का सामान आज यहां से गो-एयर हवाई जहाज से मुंबई भेजा गया। जहां से इस सामान को कोची भेजा जाएगा।
सिविल सोसाइटी फोरम कश्मीर के एक सदस्य जुबैर अहमद ने बताया कि हम इंसानियत के तौर पर आगे आये हैं और पीड़ित परिवारों के लिए आटा, बिस्किट, पानी, नमक, आदि जैसी जरूरत के सामान भेज रहे हैं। उन्होंने बताया कि गो-एयर इस सब सामान को मुफ्त केरल पहुंचा रहा है।
जुबैर के मुताबिक उनका सम्पर्क केरल में इस वक्त काम कर रहे कुछ एनजीओ के साथ है, जिनके द्वारा इस सामान को पीड़ितों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पहला कंसाइनमेंट है और यह काम जारी रहेगा।
वहीं टीम रेड भी कम्बल, कपड़े, पीने का पानी, आदि जैसी सामग्री भेज चुकी है और आगे के लिए भी इक्कठा कर रही है। टीम रेड के चैर्मान सादत सोगामी ने बताया कि हम खुद 2014 में इस बाढ़ की पीड़ा को झेल चुके हैं और हम इस समय केरल के पीड़ितों का दर्द महसूस कर सकते हैं। इसलिए हमने एक जुट होकर चीजें इक्कठा कर उनकी मदद के लिए सामने आये हैं और इस सबके लिए हुम्वाहन के स्थानीय एनजीओ के संपर्क में है जो हमारी मदद कर रही है।
गौरतलब है कि इस बीच जम्मू कश्मीर बैंक के कर्मचारियों ने भी अपने वेतन दान करने का फैसला लिया है। बैंक के प्रवक्ता सजाद बजा ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को 11 करोड़ रुपए देने का फैसला लिया गया है। बैंक के चेयरमैन ने दो महीनों का जबकि बाकी कर्मचारियों ने अपने 6 दिन का वेतन देने का फैसला किया है।
बता दें कि इसे पहले राज्यपाल ने राज्य की तरफ से 2 करोड़ देने की घोषणा की थी और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी एक माह का वेतन दान किया है। इनके अलावा भी कश्मीर में कई जगहों से केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आवाजे उठती दिख रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लगतार लोगों से धान करने की अपील हो रही है क्योंकि शायद बाढ़ की पीड़ा को कश्मीर से बेहतर कोई नहीं समझ पायेगा।