Kashmiri Pandits Target Killing: कश्मीरी पंडितों की हत्या पर सरकार ने बदली रणनीति, अब दूरदराज नहीं होगी तैनाती
राहुल भट की हत्या के बाद सरकार ने रणनीति में बदलाव किया है। अब प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित समुदाय के कर्मचारियों की दूरदराज के इलाकों में तैनाती नहीं होगी। कश्मीर संभाग के सभी 10 जिलों में कर्मचारियों का ब्योरा जुटाया गया है।
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कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट की तहसील कार्यालय में हत्या के बाद सरकार ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित समुदाय के कर्मचारियों की दूरदराज के इलाकों में तैनाती नहीं होगी। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाएगा। उनकी जिला मुख्यालयों पर ही तैनाती होगी। पहले चरण में ऐसे 859 कर्मचारियों की प्रशासन ने सूची तैयार की है, जिन्हें आठ से 10 दिनों के भीतर नए स्थानों पर तैनाती दी जाएगी। ऐसा उनमें सुरक्षित होने का भाव जगाने के लिए किया जा रहा है। उनके कार्यस्थलों के साथ ही कैंपों और किराये पर रह रहे स्थानों पर भी सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए जाएंगे।
प्रशासन से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि कश्मीर संभाग के सभी 10 जिलों में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त सभी कर्मचारियों का ब्योरा जुटाया गया है। इनमें 859 कर्मचारी ऐसे पाए गए जिनकी दूरदराज और दुर्गम इलाके में तैनाती है। इन सभी कर्मचारियों को सुरक्षा का खतरा हो सकता है। ऐसे में पहले चरण में इन्हें समायोजित किया जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि इनकी डीसी कार्यालय परिसर में ही तैनाती करने की कोशिश की जाएगी। अब जहां कहीं भी इनकी तैनाती होगी वहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध होंगे। प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जाएगा कि कर्मचारियों में सुरक्षा की भावना बनी रहे। इसके लिए संबंधित जिलों के डीसी को हिदायत दी जाएगी कि वे समय-समय पर इनसे संवाद कर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए पूरी घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत लगभग साढ़े चार हजार कर्मचारी नियुक्त हैं। सरकार ने छह हजार पद इसके लिए तय किए हैं। ये सभी कर्मचारी स्कूल, राजस्व, चिकित्सा समेत अन्य विभागों में काम कर रहे हैं। ऑल पीएम पैकेज इम्प्लाइज फोरम के प्रवक्ता संजय कौल का कहना है कि पैकेज का प्रावधान उनमें मातृभूमि का भाव जागृत करने के लिए किया गया था, लेकिन इन घटनाओं की वजह से उनमें डर व भय का माहौल बना है। सरकारी रवैये और आतंकी गतिविधियों की वजह से अब वे अपने को मातृभूमि से अलग होता पा रहे हैं। सरकार को भेजे ज्ञापन में उन्होंने सुरक्षित स्थानों पर तैनाती देने की मांग की है। इसके तहत राहत आयुक्त जम्मू कार्यालय से उन्हें संबद्ध कर दिया जाए ताकि आगे की सेवाएं उनके कहने पर वे दे सकें।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की एक सप्ताह में सुरक्षित स्थानों पर तैनाती कर दी जाएगी। उनकी कुछ और शिकायतें हैं उन पर भी गौर किया जाएगा। हम उनके दर्द और कठिनाइयों को समझते हैं। वे जहां भी रहेंगे प्रशासन उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करेगा। - मनोज सिन्हा, उप राज्यपाल