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कश्मीरी पंडितों की वापसी के रास्ते खुले, वे आना चाहते हैं या नहीं, उनका फैसला : नागी
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श्रीनगर। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रूबल नागी ने कहा कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के रास्ते खुले हैं। अब यह उनका अपना फैसला है कि वे यहां आना चाहते हैं या नहीं।
पांच दिवसीय कश्मीर दाैरे पर पहुंचीं नागी ने कहा, कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर घाटी में सब कुछ शांतिपूर्ण व अच्छा है। उन्होंने कहा, जो हुआ है उसे भुलाकर हमें भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। आज हम एक धार्मिक कट्टरपंथी देश नहीं हैं, क्योंकि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन सभी मिलकर रहते हैं। उन्होंने कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान अधिकार व सुरक्षा के लिए आयोग के निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया।
आयोग अल्पसंख्यकों के समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध : श्रीनगर में एक प्रेसवार्ता में नागी ने आयोग के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट किया। इनमें अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि उन्हें सरकारी लाभ व सेवाओं का पूरा लाभ प्राप्त हो। नागी ने कहा कि आयोग हाशिए पर पड़े समूहों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि अल्पसंख्यकों को सरकारी निकायों में समान प्रतिनिधित्व मिले और उन्हें संसाधनों का न्यायपूर्ण हिस्सा मिले। आयोग संपत्ति अधिकारों, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, सामुदायिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। संवाद
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पांच दिवसीय कश्मीर दाैरे पर पहुंचीं नागी ने कहा, कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर घाटी में सब कुछ शांतिपूर्ण व अच्छा है। उन्होंने कहा, जो हुआ है उसे भुलाकर हमें भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। आज हम एक धार्मिक कट्टरपंथी देश नहीं हैं, क्योंकि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन सभी मिलकर रहते हैं। उन्होंने कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान अधिकार व सुरक्षा के लिए आयोग के निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया।
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आयोग अल्पसंख्यकों के समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध : श्रीनगर में एक प्रेसवार्ता में नागी ने आयोग के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट किया। इनमें अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि उन्हें सरकारी लाभ व सेवाओं का पूरा लाभ प्राप्त हो। नागी ने कहा कि आयोग हाशिए पर पड़े समूहों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि अल्पसंख्यकों को सरकारी निकायों में समान प्रतिनिधित्व मिले और उन्हें संसाधनों का न्यायपूर्ण हिस्सा मिले। आयोग संपत्ति अधिकारों, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, सामुदायिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। संवाद

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