EXCLUSIVE: मोदी के चाणक्य ने निकाला कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान पत्थरबाजी रोकने का फार्मूला
कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ों के दौरान पत्थरबाजों के प्रदर्शनों की आड़ में भागने वाले आतंकियों का भविष्य अब मुश्किल में पड़ने लगा है। नोटबंदी के बाद कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों की संख्या में आई कमी अब आतंकियों की मुठभेड़ के दौरान भी अपना असर दिखाने लगी है।
दरअसल कश्मीर घाटी में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान हमेशा से ही हिंसक प्रदर्शन होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं में न सिर्फ आतंकी मुठभेड़ वाले इलाकों में हिंसा से सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें शामिल होती है बल्कि आतंकियों को भागने देने का रास्ता देने की कोशिश भी की जाती है।
कश्मीर में कई सालों से सेना के लिए चुनौती बनी इस समस्या का अंत पीएम मोदी के उस फैसले से हुआ जब कि उन्होंने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों पर रोक लगा दी। सरकार के इस फैसले के बाद बंद हुई पत्थरबाजों की दिहाड़ी से कश्मीर में हिंसा पर तो रोक लग ही गई लेकिन इसका बड़ा फायदा कश्मीर में आतंक निरोधी आपरेशनों में हुआ।
हजारों की संख्या में आने वाली भीड़ अब दर्जनों में सिमटी
अब चूंकि कश्मीर में आतंक के खिलाफ ऑपरेशनों में तेजी आई है तो इन ऑपरेशनों के दौरान हिंसा की समस्या एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरी है। लेकिन बड़ी बात ये कि 90 के दशक से लेकर पिछले साल तक जिन हिंसक प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते थे अब उसमे बमुश्किल 50 लोग जुट पाते हैं।
नोटबंदी और अलगाववादियों की सभी फंडिंग पर कसने वाले शिकंजे का असर इन्हीं हिंसक प्रदर्शनों में दिख रहा है। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय रक्षामंत्री अरूण जेटली ने भी संसद सत्र में बोलते हुए दी है।
कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों में शामिल होने वाले पत्थरबाजों पर रोक के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाई गई है। इसमें न सिर्फ पत्थरबाजों के फंडिंग सोर्सेज पर लगाम लगा दी गई है बल्कि मुठभेड़ के दौरान इनकी आपसी बातचीत को भी बैन करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा है।
मुठभेड़ के दौरान इंटरनेट बैन का भी पड़ रहा है असर
इस क्रम में मुठभेड़ के स्थान के आसपास के इलाकों में इंटरनेट बैन को एक प्रमुख जरिया बनाया गया है। इसके साथ ही हिंसा की घटनाओं में शामिल होने वाले पत्थरबाजों की पहचान की जाने लगी है जिससे कि इनकी गिरफ्तारी की जा सके।
वहीं सीआरपीएफ को विशेष रूप से पत्थरबाजों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दे दी गई है। वहीं एसओजी और राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट के जवानों को आतंकियों को मार गिराने का काम दिया गया है।