{"_id":"7dca43bfe5ef10b796e2e362581ccde9","slug":"kashmir-tourism-will-be-popular-on-social-media-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोशल मीडिया पर लुभाएगी कश्मीर की खूबसूरती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोशल मीडिया पर लुभाएगी कश्मीर की खूबसूरती
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 29 Nov 2015 07:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य पर्यटन विभाग देश के बड़े पर्यटन माडलों का अध्ययन करेगा ताकि इसको रियासत की पर्यटन नीति में शामिल कर पर्यटकों को ऐसे ही माडल जमीनी स्तर पर मुहैया कराए जाएं।
विज्ञापन
सोशल मीडिया पर भी जम्मू कश्मीर का पर्यटन विभाग अपना विस्तार करेगा। राज्य पर्यटन सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक में सदस्यों ने यह सब सुझाव दिए हैं।
सदस्यों ने अपने सुझाव देते हुए कहा कि जैसे ही पर्यटक रियासत के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट पर पहुंचें, तो उनको ऐसे माहौल देने की कोशिश करें, जिससे उनके जेहन में सुरक्षा को लेकर कोई दुविधा न हो।
विज्ञापन
इससे पर्यटकों के भीतर रियासत के प्रति सही धारणा पैदा की जा सकती है। कश्मीर के प्रति गलत प्रचार का मुकाबला करने के लिए बैठक में पीआर एजेंसियों की मदद लेने पर भी सहमति बनी है।
विज्ञापन
सदस्यों ने कहा कि यदि मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद में पीआर एजेंसियां होंगी तो कश्मीर के प्रति दुष्प्रचार को रोका जा सकता है।
इससे पहले सदस्यों ने कहा कि रियासत के पुनरुत्थान की सूचना देने के लिए उठाए जाने वाले शार्ट टर्म और लांग टर्म कदमों को मुख्यधारा में शामिल करने की जरूरत है। लोगों को कश्मीर में डल लेक, श्री माता वैष्णो देवी, लद्दाख में बुद्धिस्ट मंदिर आदि के बारे लोगों को बताना होगा।
माता वैष्णो देवी के लिए पर्यटकों को पैकेज, रंजीत सागर डैम, बगलिहार डैम को पर्यटन स्थल बनाने, लद्दाख को आध्यात्मिक और एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने के लिए प्रमोट करने, सनासर और श्रीनगर में पैराग्लाइडिंग साइट तलाशने आदि के सुझाव दिए गए हैं।
आदिवासी रिसर्च एंड कल्चरल फाउंडेशन के सचिव जावेद राही ने सरकार को रियासत में आदिवासी पर्यटन लाने का सुझाव दिया है।
रियासत के आदिवासी आर्थिक कार्यक्रम में राही ने कहा कि रियासत में राजोरी, पुंछ, पत्नीटाप, मानतलाई, मानसर, सोनमर्ग, पहलगाम आदि में गुज्जर बक्करवाल समुदाय के लोग रहते हैं।
यदि इन क्षेत्रों को आदिवासी पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाए तो राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। पर्यटक गुज्जर बक्करवाल लोगों की जिंदगी के बारे बारीकी से जानेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा।