कश्मीर हाउस बोट उद्योग बदहाली के कगार पर
- बीते 27 वर्षों में कश्मीर के ख़राब हालात और सरकार की ओर से दोबारा हाउस बोट बनाने की इजाज़त न मिलने से इससे जुड़े लोगों को दूसरे काम तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है।
- सौ साल पुराने हाउस बोट की ख़ूबसूरती और मालिकों की इस काम में दिलचस्पी को आसानी से समझा जा सकता है। एक ज़माना ऐसा भी था जब हाउस बोट में फोटोग्राफ़ी की दुकानें चलायी जाती थीं।
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कश्मीर के लाखों लोग हाउस बोट के कारोबार से जुड़े हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी इस कारोबार को आगे बढ़ाते आये हैं।यहां आने वाले पर्यटकों के लिए हाउस बोट एक बड़ी दिलचस्पी का सबब होते हैं।
शायद ही कोई पर्यटक ऐसा होगा जो कश्मीर के हाउस बोट में कुछ समय न बिताना चाहे। बॉलीवुड की कई मशहूर फ़िल्में भी हाउस बोट पर फिल्माई गयी हैं।
नई पीढ़ी इस काम से दूर भागना चाहती है
बीते 27 वर्षों में कश्मीर के ख़राब हालात और सरकार की ओर से दोबारा हाउस बोट बनाने की इजाज़त न मिलने से इससे जुड़े लोगों को दूसरे काम तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है।
डल झील और झेलम नदी में ऐसे कई ख़स्ताहाल हाउस बोट देखे जा सकते हैं। हाउस बोट के ये बदहाल हालात इस उद्योग को नुकसान की तरफ ले जा रहे हैं।
' अब इस काम में पैसा नहीं हैं'
सौ साल पुराने हाउस बोट की ख़ूबसूरती और मालिकों की इस काम में दिलचस्पी को आसानी से समझा जा सकता है। एक ज़माना ऐसा भी था जब हाउस बोट में फोटोग्राफ़ी की दुकानें चलायी जाती थीं।
तीन पीढ़ियों से हाउस बोट के धंधे से जुड़े 32 वर्षीय एजाज़ अहमद कहते हैं ' अब इस काम में पैसा नहीं हैं। दूसरा काम न तलाशना पड़े' गुलाम मोहमद शूरा का परिवार सात पीढ़ियों से हाउस बोट चला रहा है।
लेकिन उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतें भी इस काम से पूरी नहीं हो पा रही हैं। वह बीते तीन सालों से अपने हाउस बोट को दोबारा बनाने की सोच रहे हैं लेकिन कमाई उतनी नहीं है कि वह ऐसा कर सकें।