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Pahalgam Attack: 'आतंकियों ने कश्मीरियत को दाग लगाया... मददगारों को फांसी पर लटका दो'; NIA के खुलासे से गुस्सा
Tue, 24 Jun 2025 02:53 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Jun 2025 02:53 PM IST
सार
पहलगाम के हमलावरों के मददगारों की गिरफ्तारी के बाद कश्मीर में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि आतंकी मददगारों को फांसी पर लटका दो। आतंकियों के मददगारों की हर कोई निंदा कर रहा है।
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पहलगाम में आतंकी हमले के बाद तैनात पुलिस(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कश्मीर में इस वक्त जबदस्त आक्रोश है। वे गुस्से में हैं उनके खिलाफ, जिन्होंने पहलगाम के हमलावर आतंकियों की मदद की। एनआईए ने रविवार को जब दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया तो लोगों को हमले में स्थानीय लोगों की भूमिका का पता चला।
इसकी कश्मीर का हर वर्ग निंदा कर रहा है। सभी का जोर और उनकी मांग है कि ऐसे सहयोगियों को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि हम पहले भी आतंकवाद के खिलाफ थे। जिन्होंने आतंकियों का साथ दिया है, वो हमारे और हमारे कश्मीर के दुश्मन हैं।
एनआईए ने पहलगाम में हुए हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में रविवार को दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान पहलगाम के बटकोट निवासी परवेज अहमद जोथर और पहलगाम के हिल पार्क निवासी बशीर अहमद जोथर के रूप में हुई है।
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एजेंसी के अनुसार, इन्होने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। दोनों लोगों ने हमले को अंजाम देने वाले तीन आतंकवादियों की पहचान बताई है। आतंकवादियों की पुष्टि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक के रूप में बताई है।
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इसकी कश्मीर का हर वर्ग निंदा कर रहा है। सभी का जोर और उनकी मांग है कि ऐसे सहयोगियों को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि हम पहले भी आतंकवाद के खिलाफ थे। जिन्होंने आतंकियों का साथ दिया है, वो हमारे और हमारे कश्मीर के दुश्मन हैं।
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एनआईए ने पहलगाम में हुए हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में रविवार को दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान पहलगाम के बटकोट निवासी परवेज अहमद जोथर और पहलगाम के हिल पार्क निवासी बशीर अहमद जोथर के रूप में हुई है।
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एजेंसी के अनुसार, इन्होने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। दोनों लोगों ने हमले को अंजाम देने वाले तीन आतंकवादियों की पहचान बताई है। आतंकवादियों की पुष्टि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक के रूप में बताई है।
एक स्थानीय दुकानदार मुजफ्फर अहमद ने कहा कि जिस दिन 22 अप्रैल को यह बर्बरतापूर्ण हमला हुआ, हम सभी कश्मीरी एक ही आवाज में इस हमले की निंदा करते हुए सड़कों पर उतरे। मृतकों के परिवार वालों के साथ अपनी संवेदना व्यक्त की।
अब जब एनआईए ने दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है जिनपर आतंकवादियों को मदद करने का आरोप है, आज भी हम अपने अल्फ़ाज़ों के साथ खड़े हैं। हम आज भी कड़े शब्दों में आज भी निंदा करते हैं।
आतंकियों ने कश्मीरियत को दाग लगाया
एक अन्य स्थानीय मोहम्मद नवाज ने कहा कि हमारा कश्मीर इंसानियत और कश्मीरियत के साथ-साथ मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन निहथे पर्यटकों पर जो हुआ हम सबको इसका दुख है। हमलावरों ने हमारी कश्मीरियत पर एक गहरा दाग लगाया है और उसके पीछे जो कोई भी जिम्मेदार है वो कश्मीरियों का दुश्मन है। जो दो आरोपी एनआईए ने पकडे़ हैं, उनके खिलाफ पुख्ता सबूत सार्वजनिक कर इन्हें सबके सामने सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसी नापाक हरकत न अंजाम दे। इससे एक कड़ा संदेश जाएगा कि आतंकवादियों या आतंकवाद का साथ देने वालों का ऐसा हश्र होगा।
एक अन्य स्थानीय मोहम्मद नवाज ने कहा कि हमारा कश्मीर इंसानियत और कश्मीरियत के साथ-साथ मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन निहथे पर्यटकों पर जो हुआ हम सबको इसका दुख है। हमलावरों ने हमारी कश्मीरियत पर एक गहरा दाग लगाया है और उसके पीछे जो कोई भी जिम्मेदार है वो कश्मीरियों का दुश्मन है। जो दो आरोपी एनआईए ने पकडे़ हैं, उनके खिलाफ पुख्ता सबूत सार्वजनिक कर इन्हें सबके सामने सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसी नापाक हरकत न अंजाम दे। इससे एक कड़ा संदेश जाएगा कि आतंकवादियों या आतंकवाद का साथ देने वालों का ऐसा हश्र होगा।
आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी
पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी में व्यापक आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया गया है। ओजीडब्ल्यू के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए भी सुरक्षाबलों के पूरे प्रयास जारी है। इन्ही कार्रवाइयों के चलते अभी तक करीब 4000 ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से 165 के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी में व्यापक आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया गया है। ओजीडब्ल्यू के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए भी सुरक्षाबलों के पूरे प्रयास जारी है। इन्ही कार्रवाइयों के चलते अभी तक करीब 4000 ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से 165 के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
गिरफ्तार ओजीडब्ल्यू पर ये हैं आरोप
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए ओजीडब्ल्यू पर हथियारों की तस्करी, सुरक्षाबलों की गतिविधियों पर नज़र रखने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित संचालकों को खुफिया जानकारी देने के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। जांच से पता चलता है कि उनमें से कई जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय संबंध बनाए रखते थे।
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए ओजीडब्ल्यू पर हथियारों की तस्करी, सुरक्षाबलों की गतिविधियों पर नज़र रखने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित संचालकों को खुफिया जानकारी देने के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। जांच से पता चलता है कि उनमें से कई जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय संबंध बनाए रखते थे।
अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया है कि कई ओजीडब्ल्यू अपने पाकिस्तान में बैठे संचालकों के साथ गुप्त संचार बनाए रखने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और वीपीएन का उपयोग कर रहे थे, जिससे भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए उनकी गतिविधियों को रोकना और उनकी निगरानी करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।