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केएएस 2008 की चयन प्रक्रिया कठघरे में खड़ी
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जम्मू। हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 की केएएस परीक्षा की चयन प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। रिट कोर्ट की जजमेंट के खिलाफ कोर्ट में दायर एलपीए पर शुक्रवार को जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस रजनीश ओसवाल ने सुनवाई की। इसके बाद प्रदेश लोक सेवा आयोग को आदेश दिया कि वह चयन प्रक्रिया का सारा रिकॉर्ड सील कवर में कोर्ट में पेश करे। परीक्षा के लिए न्यूनतम अंकों की कितनी आवश्यकता थी और उम्मीदवारों ने कितने अंक लिए। किन लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जिनके अंक पूरे नहीं थे। कोर्ट ने सारीब सेहरान की उत्तर शीट भी मांगी है, जिसके रिचेकिंग में नंबर बढ़ाए गए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि यह रिकॉर्ड कोर्ट के पास नहीं आता तो आयोग के सचिव अगली सुनवाई पर वर्चुअल मोड से निजी तौर पर हाजिर होकर इसका जवाब देंगे। अपीलकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उस समय कम अंक लेने वालों को भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। बताया कि अंग्रेजी की परीक्षा के लिए न्यूनतम 40 फीसदी अंक चाहिए थे। जबकि अन्य विषयों में ओपन मेरिट में न्यूनतम अंक 30 फीसदी तय थे। आरक्षित उम्मीदवारों के लिए 25 फीसदी तय थे, लेकिन बहुत से उम्मीदवार ऐसे थे, जो ओपन मेरिट में थे और उनके अंक 30 फीसदी से कम थे। इन लोगाें को भी इंटरव्यू के लिए शार्टलिस्ट कर लिया गया। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जो आयोग के सदस्यों और प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों के बड़े अफसरों के रिश्तेदार हैं। इनमें से एक सारीब सहरान भी है। जिनके पिता एक सीनियर सरकारी अफसर हैं। एक साल बाद सहरान ने अपने अंकों की रीचेकिंग कराई और इसमें उसे 135 अंक मिले, जबकि पहले 35 अंक मिले थे। अन्य तमाम उम्मीदवारों को आयोग ने रीचेकिंग में कोई भी नंबर न बढ़ने की बात कही। जेएनएफ
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हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि यह रिकॉर्ड कोर्ट के पास नहीं आता तो आयोग के सचिव अगली सुनवाई पर वर्चुअल मोड से निजी तौर पर हाजिर होकर इसका जवाब देंगे। अपीलकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उस समय कम अंक लेने वालों को भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। बताया कि अंग्रेजी की परीक्षा के लिए न्यूनतम 40 फीसदी अंक चाहिए थे। जबकि अन्य विषयों में ओपन मेरिट में न्यूनतम अंक 30 फीसदी तय थे। आरक्षित उम्मीदवारों के लिए 25 फीसदी तय थे, लेकिन बहुत से उम्मीदवार ऐसे थे, जो ओपन मेरिट में थे और उनके अंक 30 फीसदी से कम थे। इन लोगाें को भी इंटरव्यू के लिए शार्टलिस्ट कर लिया गया। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जो आयोग के सदस्यों और प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों के बड़े अफसरों के रिश्तेदार हैं। इनमें से एक सारीब सहरान भी है। जिनके पिता एक सीनियर सरकारी अफसर हैं। एक साल बाद सहरान ने अपने अंकों की रीचेकिंग कराई और इसमें उसे 135 अंक मिले, जबकि पहले 35 अंक मिले थे। अन्य तमाम उम्मीदवारों को आयोग ने रीचेकिंग में कोई भी नंबर न बढ़ने की बात कही। जेएनएफ
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