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कारगिल गाथा: शहीद कैप्टन विजयंत थापर की ये थी अंतिम ख्वाहिश

ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 26 Jul 2016 02:47 PM IST
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रुखसाना को आज भी पहुंचती हैं पॉकेट मनी और चॉकलेट
रुखसाना को आज भी पहुंचती हैं पॉकेट मनी और चॉकलेट - फोटो : www.captainvijyantthapar.com
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कारगिल युद्ध के शहीदाें की कहानियां कहीं रोंगटे खड़े करने वाली हैं तो कहीं रुआंसा करने वाली। मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विजयंत थापर के आखिरी खत का मजमून देश को समर्पित फौजी और रिश्तों की अहमियत समझने वाले व्यक्तित्व को बयान करता है। 
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खत में कैप्टन थापर ने अपने परिजनों को युद्ध भूमि पर शहादत के प्रति अपने भाव, देश के लिए बार बार मरने की इच्छा और युवा पीढ़ी को भारतीय सैनिकों की शौर्य गाथा से अवगत करवाने की चाहत को व्यक्त किया। 
इसी खत में कुपवाड़ा स्थित सैन्य शिविर से सटे स्कूल में पढ़ने वाली चार बरस की रुखसाना का भी जिक्र है जिसे कैप्टन थापर चॉकलेट और सालाना पचास रुपये की पॉकेटमनी दिया करते थे। खत में कैप्टन ने घरवालाें को लिखा वे नहीं रहे तो अनाथ आश्रम की मदद करें। रुखसाना को 50 रुपये देते रहें। 
बेटे के इस आखिरी खत को संजोए उनके पिता वीएन थापर हर साल कारगिल युद्ध की वर्षगांठ पर द्रास सेक्टर की उन पहाडि़यों तक जाते हैं जहां पर बेटे ने देश के लिए कुर्बानी दी। वे हर साल रुखसाना को चॉकलेट और 50 रुपये देना नहीं भूलते। कैप्टन विजयंत थापर रुखसाना के बड़ी होने पर उसके निकाह में शामिल होना चाहते थे। लेकिन कारगिल युद्ध में शहीद हो गए।
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