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'जिहाद पवित्र है तो कश्मीरी अलगाववादी अपने बच्चों को क्यों नहीं बंदूक थमाते?'
एजेंसी/श्रीनगर
Updated Sun, 10 Jul 2016 11:16 AM IST
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हाशिम कुरैशी
- फोटो : ANI
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हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी में हुई हिंसा में 12 लोगों की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापकों में से एक हाशिम कुरैशी के बेटे जुनैद ने अलगाववादियों पर जमकर निशाना साधा है। जुनैद नीदरलैंड में रहते हैं और एक सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
जुनैद ने कहा कि कश्मीरी नौजवान अलगाववादियों से ये सवाल पूछें कि अगर जिहाद और कश्मीर की आजादी के लिए बंदूक उठाना जरूरी है तो फिर वे क्यों अपने बच्चों को बंदूक नहीं थमाते।
कश्मीर की आजाद की दुहाई देने वाले अलगाववादियों के बच्चे मलेशिया, कनाडा और अमेरिका में हैं। कइयों के बच्चे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहकर या तो पढ़ाई कर रहे या फिर नौकरी। अलगाववादी दूसरों के बच्चों को बंदूक उठाकर मरने के लिए ही क्यों उकसाते हैं।
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जुनैद ने कहा कि कश्मीरी नौजवान अलगाववादियों से ये सवाल पूछें कि अगर जिहाद और कश्मीर की आजादी के लिए बंदूक उठाना जरूरी है तो फिर वे क्यों अपने बच्चों को बंदूक नहीं थमाते।
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कश्मीर की आजाद की दुहाई देने वाले अलगाववादियों के बच्चे मलेशिया, कनाडा और अमेरिका में हैं। कइयों के बच्चे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहकर या तो पढ़ाई कर रहे या फिर नौकरी। अलगाववादी दूसरों के बच्चों को बंदूक उठाकर मरने के लिए ही क्यों उकसाते हैं।
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'बंदूक उठाना कश्मीर समस्या का समाधान नहीं'
kashmir protest
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि कश्मीर में जब कोई युवा मरता है तो अलगाववादी उसे हीरो बनाने की कोशिश करते हैं और दूसरे कश्मीरी युवाओं को उसी रास्ते पर जाने को कहते हैं।
उन्हें भी बुरहान की मौत का दुख है और उसके बाद भड़की हिंसा में 12 लोगों को मारा जाना भी दुखदायी है। यह सही है कि कश्मीर में विमुखता है, कश्मीरी नौजवानों में गुस्सा है और उनके अंदर बगावत और विद्रोह की भावना को मैं सही या गलत नहीं ठहराता।
जुनैद ने कहा कि कश्मीर के युवाओं को समझना होगा कि बंदूक उठाना किसी भी समस्य़ा का सामाधान नहीं है। बुरहान मेरे भाई की उम्र का था और वह डॉक्टर, इंजीनियर, लेखक या कवि या फिर एक्टर बन सकता था। अगर घाटी में हो रही चीजों को लेकर लोगों में गुस्सा था तो वह इसके दूसरे तरीके से पेश कर सकता था, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने के बाद आखिर उसने अपनी नियति को गले लगाया।
उन्हें भी बुरहान की मौत का दुख है और उसके बाद भड़की हिंसा में 12 लोगों को मारा जाना भी दुखदायी है। यह सही है कि कश्मीर में विमुखता है, कश्मीरी नौजवानों में गुस्सा है और उनके अंदर बगावत और विद्रोह की भावना को मैं सही या गलत नहीं ठहराता।
जुनैद ने कहा कि कश्मीर के युवाओं को समझना होगा कि बंदूक उठाना किसी भी समस्य़ा का सामाधान नहीं है। बुरहान मेरे भाई की उम्र का था और वह डॉक्टर, इंजीनियर, लेखक या कवि या फिर एक्टर बन सकता था। अगर घाटी में हो रही चीजों को लेकर लोगों में गुस्सा था तो वह इसके दूसरे तरीके से पेश कर सकता था, लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने के बाद आखिर उसने अपनी नियति को गले लगाया।