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जम्मू-कश्मीरः हाईकोर्ट ने मांगा दो वर्ष में चार दरबार मूव के खर्च का ब्योरा

Sun, 12 Apr 2020 04:49 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 12 Apr 2020 04:49 PM IST
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Joint High Court of Jammu Kashmir and Ladakh asks for details of four darbar move expenses in two years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संयुक्त हाईकोर्ट ने पिछले दो वर्ष के दौरान चार बार हुए दरबार मूव पर खर्च का ब्योरा मांगा है। कोरोना महामारी के बीच दरबार मूव पर रोक लगाने की याचिका पर हाईकोर्ट ने वित्त विभाग से खर्च, पुलिस महकमे से सुरक्षा बलों की तैनाती, एस्टेट विभाग से आवास सुविधाओं के इंतजाम पर मुकम्मल रिपोर्ट तलब की। वर्ष 2018 और 2019 में हुए चार दरबार मूव संबंधी यह रिपोर्ट अगली तारीख में देनी होगी।

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हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस रजनीश ओसवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि दरबार मूव को लेकर किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पूर्व इस व्यवस्था से जुड़े ब्योरे को देखना जरूरी है। बेंच ने वित्त सचिव, पुलिस महानिदेशक, एस्टेट विभाग के सचिव, परिवहन विभाग के सचिव, आईजीपी ट्रैफिक, एडीजी सुरक्षा से दरबार मूव संबंधी पूरा ब्योरा मांगा। इस दौरान कोरोना रोकथाम से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी सुनवाई की गई।
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सुनवाई के दौरान एडवोकेट फैसल कादरी ने कहा कि कश्मीर घाटी में कोरोना से तीन मौतें हो चुकी हैं। ऐसे हालात में दरबार मूव जैसा कदम किसी भी सूरत में सही नहीं होगा। जन सुरक्षा के अलावा कोरोना महामारी से लड़ने के लिए धनराशि की भी जरूरत है। दरबार मूव के बजाय ज्यादा से ज्यादा पैसा महामारी से लड़ने के प्रबंधन के लिए उपलब्ध होना चाहिए। कोरोना संक्रमण कश्मीर घाटी में विशेष रूप से श्रीनगर शहर में बहुत तेजी से फैल रहा है। इस दौरान घाटी में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं अपर्याप्त सिद्ध हुईं।
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श्रीनगर के एडवोकेट शफकत नजीर ने कहा कि कोरोना संक्रमण और संबंधित मुद्दों से पीड़ित की देखभाल के लिए धन की बहुत आवश्यकता है। वर्तमान में प्रवासी मजदूरों, ग्रामीणों, संविदा कर्मचारियों और अन्य जो बिना आजीविका के हैं, इनके लिए धन का प्रावधान होना चाहिए। वकील फैसल कादरी ने कहा कि अब तक पुलिसकर्मी संक्रमित व्यक्तियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

 

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