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जेकेएलएफ पर प्रतिबंध के खिलाफ बंद रहा कश्मीर, कारोबार ठप, सड़कों पर नहीं चले वाहन
Sun, 24 Mar 2019 11:42 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 24 Mar 2019 11:42 PM IST
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कश्मीर बंद के दौरान ड्रोन से निगरानी करते सुरक्षाकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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कश्मीर घाटी में रविवार को बुलाए गए बंद से आम जनजीवन प्रभावित रहा। जेआरएल (ज्वाइंट रेसिसटेंट लीडरशिप) ने यासीन मलिक के नेतृत्व वाले संगठन जेकेएलएफ (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट)पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए प्रतिबंध के खिलाफ बंद का आह्वान किया था।
बंद के दौरान वादी के अधिकांश इलाकों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। इस दौरान सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहा। अधिकारियों का दावा है कि वादी के बहुत थोड़े हिस्से में इसका असर दिखाई दिया। अधिकांश लोग इस बंद में शामिल नहीं हुए। प्रत्येक रविवार को यहां लगने वाला साप्ताहिक बाजार सामान्य तौर पर खुला रहा।
जेकेएलएफ इस महीने जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधित होने वाला दूसरा संगठन है। इससे पहले जमात-ए-इस्लामी को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित किया था।
जेकेएलएफ पर प्रतिबंध की घोषणा के दौरान शुक्रवार को केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने कहा था कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जेकेएलएफ को 1988 के बाद से हिंसक घटनाओं में शामिल रहने और अलगाववादी गतिविधियों में आगे रहने के कारण प्रतिबंधित किया गया।
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अलगाववादियों ने शनिवार को हड़ताल बुलाते हुए कहा था कि जेकेएलएफ को प्रतिबंधित करने का केंद्र सरकार का फैसला अलोकतांत्रिक है। केंद्र अपनी कार्रवाइयों से यहां की जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।
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बंद के दौरान वादी के अधिकांश इलाकों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। इस दौरान सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद रहा। अधिकारियों का दावा है कि वादी के बहुत थोड़े हिस्से में इसका असर दिखाई दिया। अधिकांश लोग इस बंद में शामिल नहीं हुए। प्रत्येक रविवार को यहां लगने वाला साप्ताहिक बाजार सामान्य तौर पर खुला रहा।
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जेकेएलएफ इस महीने जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधित होने वाला दूसरा संगठन है। इससे पहले जमात-ए-इस्लामी को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित किया था।
जेकेएलएफ पर प्रतिबंध की घोषणा के दौरान शुक्रवार को केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने कहा था कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जेकेएलएफ को 1988 के बाद से हिंसक घटनाओं में शामिल रहने और अलगाववादी गतिविधियों में आगे रहने के कारण प्रतिबंधित किया गया।
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अलगाववादियों ने शनिवार को हड़ताल बुलाते हुए कहा था कि जेकेएलएफ को प्रतिबंधित करने का केंद्र सरकार का फैसला अलोकतांत्रिक है। केंद्र अपनी कार्रवाइयों से यहां की जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।