जम्मू कश्मीर: पहाड़ियों को एसटी के दर्जे के खिलाफ गुज्जर-बक्करवाल, कुपवाड़ा से शुरू किया पैदल मार्च
पहाड़ी समुदाय के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की घोषणा के बाद प्रदेश के गुज्जर-बकरवाल समुदाय में आक्रोश है। गुर्जर और बकरवाल समुदायों के सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ शुक्रवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले से एक पैदल मार्च निकाला।
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पहाड़ी समुदाय के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की घोषणा के बाद प्रदेश के गुज्जर-बकरवाल समुदाय में आक्रोश है। गुर्जर और बकरवाल समुदायों के सदस्यों ने इसके ख़िलाफ शुक्रवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले से पैदल मार्च निकाला।
उन्होंने बताया कि अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए वह इस पैदल मार्च को लखनपुर तक ले जाएंगे। बता दें कि हाल ही में पहाड़ियों को एसटी के दर्जे की सिफारिश के खिलाफ आवाज उठाने के लिए गुज्जर बकरवाल समुदाय द्वारा एक ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) का गठन किया था।
जिसमें गुर्जर-बकरवाल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर, गुर्जर-बकरवाल यूथ वेलफेयर कॉन्फ्रेंस, ऑल ट्राइबल कोऑर्डीनेशन कमेटी, इंटरनेशनल गुज्जर महासभा व गुज्जर-बकरवाल स्टूडेंट यूनियन और निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं सहित कई समूहों के सदस्य शामिल हैं।
जनजातीय कार्यकर्ता और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की जनजातीय शाखा के युवा अध्यक्ष एवं जेएसी के प्रवक्ता तालिब हुसैन ने कहा, हमने आज कुपवाड़ा से ट्राइबल बचाओ मार्च की शुरुआत की। यह कठुआ के लखनपुर तक चलेगा।
इस दौरान जहां भी ट्राइबल पापुलेशन है, उन इलाकों से होते हुए हम जम्मू पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इस मार्च को निकालने का मकसद यह है कि जो उच्च जाति के लोगों को एसटी का दर्जा दिया जा रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाना है।
तालिब ने कहा कि पहाड़ियों को जो एसटी का दर्जा दिया गया और जो यह प्रक्रिया चल रही है हम उसके खिलाफ हैं। उन्होंने कहा भारतीय संविधान के अनुसार ट्राइबल का दर्जा दिए जाने के लिए 5 मानदंड रखे गए हैं। इन पांचों मानदंडों को जो भी पूरा करता है उसे यह दर्जा दिया जाएगा।
जैसे गद्दियों ने किया, वो हिन्दू थे लेकिन हमने कभी ऐतराज नहीं किया। तालिब ने कहा कि इस कमेटी के तहत यह दर्जा हासिल करने के लिए विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव, बड़े पैमाने पर समुदाय के साथ संपर्क की शर्म और पिछड़ापन होना जरूरी है।
इसके बावजूद पहाड़ियों को दर्जा देने के लिए भारतीय संविधान को एक तरफ रखते हुए गैर-ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मार्च भारतीय संविधान बचाओ मार्च भी है। तालिब ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि उच्च जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए।