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विधानसभा सत्र: जीएसटी पर राजी, संविधान से समझौता नहीं
एजेंसी/श्रीनगर
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:21 AM IST
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विधानसभा में बोलते वित्त मंत्री
- फोटो : Amar Ujala
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वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने अगले छह से आठ महीने में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू होने की संभावना जताते हुए कहा कि राज्य सरकार भी जीएसटी का हिस्सा बनना चाहती है। राज्य की ज्यादा निर्भरता चूंकि आयात पर है, लिहाजा जीएसटी से राज्य को व्यापक लाभ मिलेगा।
सरकार जीएसटी के नाम पर अपनी सांविधानिक स्थिति से समझौता नहीं करेगी। नई औद्योगिक नीति पर के मुद्दे पर विधान परिषद में बोल रहे द्राबू ने कहा राज्य को स्टेट असेट्स एक्ट 1962 के तहत कर सेवाओं से संबंधित विशेष अधिकार हैं। ऐसे में जीएसटी प्रणाली को अपनाते हुए सरकार इस अधिकार से समझौता नहीं करेगी।
द्राबू ने कहा कि सरकार गहनता से विभिन्न पहलुओं को जांच परख रही है, ताकि जीएसटी में शामिल होने से राज्य को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जीएसटी बिल राज्यसभा के मानसून सत्र में पेश होने जा रहा है।
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औद्योगिक नीति में संशोधन पर जवाब देते हुए द्राबू ने कहा सरकार ने केवल उन प्रावधानों को वापस लिया है, जिनके दुरुपयोग की आशंका थी।
उन्होंने कहा नई औद्योगिक नीति के पीछे मुख्य मकसद सुविधाओं का अभाव झेल रहे औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करना था। जब इस विषय पर हित धारकों ने आपत्तियां दर्ज करवाकर दुरुपयोग की संभावना जताई तो सरकार ने बिना देरी के इसे वापस ले लिया। संशोधन के बाद अब केवल स्थानीय औद्योगिक संगठनों को ही निजी औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।
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सरकार जीएसटी के नाम पर अपनी सांविधानिक स्थिति से समझौता नहीं करेगी। नई औद्योगिक नीति पर के मुद्दे पर विधान परिषद में बोल रहे द्राबू ने कहा राज्य को स्टेट असेट्स एक्ट 1962 के तहत कर सेवाओं से संबंधित विशेष अधिकार हैं। ऐसे में जीएसटी प्रणाली को अपनाते हुए सरकार इस अधिकार से समझौता नहीं करेगी।
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द्राबू ने कहा कि सरकार गहनता से विभिन्न पहलुओं को जांच परख रही है, ताकि जीएसटी में शामिल होने से राज्य को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जीएसटी बिल राज्यसभा के मानसून सत्र में पेश होने जा रहा है।
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औद्योगिक नीति में संशोधन पर जवाब देते हुए द्राबू ने कहा सरकार ने केवल उन प्रावधानों को वापस लिया है, जिनके दुरुपयोग की आशंका थी।
उन्होंने कहा नई औद्योगिक नीति के पीछे मुख्य मकसद सुविधाओं का अभाव झेल रहे औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करना था। जब इस विषय पर हित धारकों ने आपत्तियां दर्ज करवाकर दुरुपयोग की संभावना जताई तो सरकार ने बिना देरी के इसे वापस ले लिया। संशोधन के बाद अब केवल स्थानीय औद्योगिक संगठनों को ही निजी औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।