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'शहीद के शव के साथ बर्बरता पर सियासी खामोशी चिंताजनक'
ब्यूरो, अमर उजाला/सांबा
Updated Sat, 29 Oct 2016 09:18 PM IST
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जवानों से मिलते केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
- फोटो : PTI
पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय सेना के शहीद जवान के शरीर के साथ बर्बरता पर सियासी नेताओं की चुप्पी चिंताजनक है।
सीमावर्ती गांव राजपुरा में शनिवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे सिंह ने कहा देश की रक्षा करने वाला जवान शहीद हो जाता है। उसके शरीर के साथ पाकिस्तान बर्बरता करता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के नेता ऐसी निंदनीय घटना पर चुप रहते हैं। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा इस मामले को भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएगा। सुरक्षा बलों के जवान मानवाधिकार हनन का शिकार हैं। सरहद के लिए जान कुर्बान करने वालों सभी अपनी दिवाली समर्पित करें।
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सीमावर्ती गांव राजपुरा में शनिवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे सिंह ने कहा देश की रक्षा करने वाला जवान शहीद हो जाता है। उसके शरीर के साथ पाकिस्तान बर्बरता करता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के नेता ऐसी निंदनीय घटना पर चुप रहते हैं। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा इस मामले को भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएगा। सुरक्षा बलों के जवान मानवाधिकार हनन का शिकार हैं। सरहद के लिए जान कुर्बान करने वालों सभी अपनी दिवाली समर्पित करें।
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अलगाववादियों को लताड़ा
डॉ. जितेंद्र सिंह
- फोटो : फाइल
घाटी के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने अलगाववादियों को जमकर लताड़ लगाई। सिंह ने कहा अलगाववादी अपनी दुकानें चला रहे हैं। पाक पर बरसते हुए उन्हाेंने कहा पाकिस्तान की आतंकवाद का जन्मदाता है।
नाम लिए बिना विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा ये नेता जब सत्ता में होते हैं तो रियासत को देश का अभिन्न हिस्सा बताते हैं लेकिन सत्ता से बाहर होते ही उन्हें जम्मू-कश्मीर के भारत विलय पर संशय होने लगता है। वे सुरक्षा बलों की शहादत पर मौन रहते हैं और बुरहानी वानी जैसे कुख्यात आतंकी को आतंकी कहने से परहेज करते हैं।
नाम लिए बिना विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा ये नेता जब सत्ता में होते हैं तो रियासत को देश का अभिन्न हिस्सा बताते हैं लेकिन सत्ता से बाहर होते ही उन्हें जम्मू-कश्मीर के भारत विलय पर संशय होने लगता है। वे सुरक्षा बलों की शहादत पर मौन रहते हैं और बुरहानी वानी जैसे कुख्यात आतंकी को आतंकी कहने से परहेज करते हैं।