दोस्त ने नाबालिग को बना दिया फिदायीन हमलावर
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उत्तरी कश्मीर के बारामुला में सुरक्षा बलों ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। पुलिस और सेना ने संयुक्त अभियान में एक पाकिस्तानी समेत कुल छह आतंकियों को पकड़ा।
पूछताछ में आतंकियों ने कई खुलासे किए हैं। उनके पास से हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुआ है। उत्तरी कश्मीर के डीआईजी गरीब दास ने बताया कि पाकिस्तानी आतंकी का नाम सादिक गुज्जर है।
वह हाल ही में कुपवाड़ा से बारामुला जिले में दाखिल हुआ था। करीब 17 साल का यह आतंकी जैश के फिदायीन दस्ते का सदस्य है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक सादिक पाकिस्तान के सियालकोट का रहने वाला है।
तीन महीने पहले कुपवाड़ा के तंगधार में 25 नवंबर को सेना के कैंप पर फिदायीन हमले में भी वह शामिल था। इसमें उसके तीन साथी मारे गए थे। सुरक्षा बल तब से ही इसे तलाश रहे थे।
जैश के फिर से सक्रिय होने के सवाल पर डीआईजी ने कहा कि उसकी कोशिश तो जारी है, लेकिन सतर्कता के चलते वह सिर नहीं उठा पा रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार जैश को धक्का पहुंच रहा है।
आतंकी ने खोले कई बड़े राज
वह दोबारा पैर जमाने की स्थिति में नहीं हैं। पहले तंगधार में उसके तीन आतंकी मारे गए, फिर हंदवाड़ा अब बारामुला में उसके मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। सादिक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने ही सेना के तंगधार कैंप के ऑयल डिपो में आग लगाई थी।
इसके बाद उसके साथियों ने उसको मौके से चले जाने के निर्देश दिए थे। उसने यह भी खुलासा किया है कि जैश के फिदायीन दस्ते के आतंकियों को पीओके के अथमुकाम स्थित लांचिंग पैड से भेजा गया था।
उन्हें एलओसी के पास सेना के कैंपों पर हमले करने का काम सौंपा गया था। साजिद ने बताया कि उसने जीपीएस की मदद से 24 नवंबर की रात को पैदल बार्डर पार किया था। इसके बाद अपने तीन साथियों के साथ लगातर सात-आठ घंटे का पैदल सफर कर तंगधार पहुंचा था।
हमले के बाद वह तीन दिनों तक जंगल में छिपा रहा। इसके बाद उसके आकाओं ने उसे कुपवाड़ा़ भेज दिया। फिर यहां से कुछ लोगों की मदद से वह बारामुला पहुंचा। सादिक सियालकोट के किसान परिवार से संबंध रखता है। उसके पांच भाई और दो बहने हैं।
स्कूल के एक दोस्त ने उसे पैसे दिलवाने का लालच देकर आतंकी संगठन में शामिल करवा दिया। उसने जैश के कैंप से तीन महीने की ट्रेनिंग हासिल की है। इस दौरान पकड़े गए जैश के अन्य पांच आतंकियों में सुहैल आरिफ, राशिद रसूल भट, जावेद अहमद धोबी, फरहान फैयाज और अहसान फैयाज शामिल हैं। इनके पास से एक एके-47 राइफल, पांच एके-47 की मैगजीन, एके-47 की 150 गोलियां, छह ग्रेनेड, एक आईकॉम वायरलेस सेट और एक मैट्रिक्स शीट (कोड भाषा) बरामद हुई है।