JDA Files Missing: जम्मू विकास प्राधिकरण में बड़ा फर्जीवाड़ा, 350 संपत्तियों के दस्तावेज गायब
कोरोना काल के बाद जब प्लाट और आवासों के आवंटी अपनी प्रापर्टी की किस्त या फिर टैक्स जमा करने जेडीए कार्यालय आए तो उन्हें जानकारी मिली कि उनकी फाइलें ही रिकार्ड रूम में नहीं हैं।
विस्तार
जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) में संपत्तियों का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलकर 350 से ज्यादा आवास और प्लाटों की फाइलें और दस्तावेज ही गायब कर दिए। यह फर्जीवाड़ा साल 2014 से 2019 के बीच जेडीए में हुआ। ताज्जुब की बात यह है कि जेडीए कार्यालय के रिकॉर्ड सेक्शन से फाइलें और दस्तावेज गायब होते रहे, मगर इसकी भनक जिम्मेदारों तक को नहीं लगी।
पूरे मामले को दबाने के लिए जेडीए से प्लाटों और आवासों के डुप्लीकेट दस्तावेज बनाकर लोगों को थमाए जाने लगे तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामले की तह में जाएं तो यह पता चलता है कि तत्कालीन सरकार के समय कर्मचारियों ने चहेतों को उपकृत करने के चक्कर में संपत्तियों के दस्तावेज गायब कराकर फर्जीवाड़ा कर दिया।
आवास एवं प्लाटों की फाइलों और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा शहर के विभिन्न इलाकों में स्थिति संपत्तियों में हुआ है। जानकार बताते हैं कि कोरोना काल के बाद जब प्लाट और आवासों के आवंटी अपनी प्रापर्टी की किस्त या फिर टैक्स जमा करने जेडीए कार्यालय आए तो उन्हें जानकारी मिली कि उनकी फाइलें ही रिकार्ड रूम में नहीं हैं। धीरे धीरे मामला खुलता गया तो पता चला कि 2014 से 2019 तक 350 संपत्तियों के दस्तावेज गायब हुए।
जेडीए की जांच में ऐसे गुम हुई फाइलें
साल- गुम फाइलों की संख्या
- 2014- 53 फाइलें गायब
- 2015- 42 फाइलें गायब
- 2016- 55 फाइलें गायब
- 2017- 67 फाइलें गायब
- 2018- 47 फाइलें गायब
- 2019- 49 फाइलें गायब
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जेडीए जिम्मेदारों पर उठते बड़े सवाल
- आवंटियों के प्लाटों और आवासों की फाइल रिकॉर्ड सेक्शन से कैसे गुम हो गई, क्योंकि कि यहां दर्जनों की संख्या में अलमारियां हैं, जिसकी चाबी जिम्मेदार कर्मचारी के पास रहती है।
- रिकार्ड रूम के बाद आवंटन दस्तावेज रखने के लिए डिवीजन एक-दो और तीन हैं, इन डिवीजन के अलग अलग इंजार्ज है, आिखर ये इंचार्ज क्या करते रहे।
- रिकार्ड रूम के तीनों डिवीजन की रखवाली में करीब 200 कर्मचारी तैनात हैं, बड़ा सवाल है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद यहां से दस्तावेज कहां चले गए।
- साल दर साल फाइलें और दस्तावेज गायब होते रहे और विभागीय जिम्मेदार अनजान बने रहे, यह कैसे संभव हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जेडीए के द्वारा पूरे मामले की जांच कराई गई थी, जिसके बाद कुछ आवंटियों को डुप्लीकेट दस्तावेज भी दिए थे। अब पूरा मामला शासन के पास है। शासन स्तर से मामले की चल रही है। -साहिल कुमार, सचिव जेडीए