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Jammu News: जतिंदर ने अटलांटिक में पांच हजार मीटर की डुबकी लगा रचा इतिहास
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अतुल सूदन
अखनूर। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी), चेन्नई के वरिष्ठ वैज्ञानिक कमांडर (सेनि.) जतिंदर पाल सिंह ने इतिहास रच दिया है। अखनूर के ग्राम टांडा के रहने वाले जतिंदर समुद्र के भीतर 5,003 मीटर से अधिक गहराई तक जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। यह असाधारण उपलब्धि उन्होंने 6 अगस्त को उत्तरी अटलांटिक महासागर में फ्रेंच सबमर्सिबल ''''नॉटिल'''' के तहत इंडो-फ्रेंच मिशन में हासिल की। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने इस मिशन की उपलब्धियों को साझा किया।
हवलदार कैप्टन मनमोहन सिंह और सुरिंदर कौर के बेटे जतिंदर सिंह ने न केवल नया भारतीय रिकॉर्ड बनाया, बल्कि 5,003 मीटर से अधिक गहराई पर फ्रांसीसी पायलट से नियंत्रण भी संभाला और नाटो क्षेत्र में मुश्किल ऑपरेशन्स को सफलता से अंजाम दिया। कैप्टन का कहना है कि देश के नाम यह उपलब्धि दर्ज कर रोमांचित हूं।
यह भारतीय विज्ञान के लिए गौरव का क्षण है
जतिंदर ने इस सफलता पर उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, 5,003 मीटर की गहराई तक पहुंच कर न केवल व्यक्तिगत सपना पूरा हुआ, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ा। इस अभियान के दौरान मेरी तैयारी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन परिवार से मिली प्रेरणा और समर्थन से मेरा उत्साह हमेशा ऊंचा रहा। यह मिशन ''''समुद्रयान'''' के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हमें गहरे समुद्र में अनुसंधान एवं संसाधनों के दोहन की नई तकनीकों की प्रत्यक्ष जानकारी मिली है। यह सफलता भारत को गहरे समुद्र अन्वेषण में आत्मनिर्भर बनाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर खोलेगी। मुझे गर्व है कि मैं इस ऐतिहासिक उपलब्धि का हिस्सा बन पाया हूं और देश का प्रतिनिधित्व कर सका।
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परिवार ने हौसला बढ़ाया -
उन्होंने बताया कि उनके पिता कैप्टन मनमोहन सिंह, माता सुरिंदर कौर, पत्नी बलजोत कौर (शिक्षिका), बेटी अजोनी कौर, बेटा जोबनदीप सिंह और बहनें सरबजीत कौर व मनप्रीत कौर (दोनों शिक्षिका) हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे हैं। परिवार का निरंतर मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सहयोग ही मेरे साहस और आत्मविश्वास की असली ताकत रहा है।
कैप्टन जतिंदर बताते हैं ,यह मिशन भारत सरकार के समुद्रयान कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी अगली कड़ी होगी स्वदेशी-मत्स्य 6000 सबमर्सिबल की ऐतिहासिक डुबकी। भारत अब ऐसे छह देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है, जिनके पास मानवयुक्त गहरे समुद्र में जाने की क्षमता है। कमांडर जतिंदर बताते हैं कि भारत अब पिछलग्गू नहीं है। वह लीडर बन कर उभर रहा है। ये उपलब्धियां हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाली हैं।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत की डबल विजय बताते हुए कहा कि हमारे देश के लोग एक साथ अंतरिक्ष और महासागर दोनों में विश्व पटल पर एक नई पहचान बना रहे हैं।
कमांडर जतिंदर पाल सिंह की साहसिक उपलब्धि और देशभक्ति हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और भारत के आत्मनिर्भर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है।
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अखनूर। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी), चेन्नई के वरिष्ठ वैज्ञानिक कमांडर (सेनि.) जतिंदर पाल सिंह ने इतिहास रच दिया है। अखनूर के ग्राम टांडा के रहने वाले जतिंदर समुद्र के भीतर 5,003 मीटर से अधिक गहराई तक जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। यह असाधारण उपलब्धि उन्होंने 6 अगस्त को उत्तरी अटलांटिक महासागर में फ्रेंच सबमर्सिबल ''''नॉटिल'''' के तहत इंडो-फ्रेंच मिशन में हासिल की। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने इस मिशन की उपलब्धियों को साझा किया।
हवलदार कैप्टन मनमोहन सिंह और सुरिंदर कौर के बेटे जतिंदर सिंह ने न केवल नया भारतीय रिकॉर्ड बनाया, बल्कि 5,003 मीटर से अधिक गहराई पर फ्रांसीसी पायलट से नियंत्रण भी संभाला और नाटो क्षेत्र में मुश्किल ऑपरेशन्स को सफलता से अंजाम दिया। कैप्टन का कहना है कि देश के नाम यह उपलब्धि दर्ज कर रोमांचित हूं।
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यह भारतीय विज्ञान के लिए गौरव का क्षण है
जतिंदर ने इस सफलता पर उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, 5,003 मीटर की गहराई तक पहुंच कर न केवल व्यक्तिगत सपना पूरा हुआ, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ा। इस अभियान के दौरान मेरी तैयारी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन परिवार से मिली प्रेरणा और समर्थन से मेरा उत्साह हमेशा ऊंचा रहा। यह मिशन ''''समुद्रयान'''' के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हमें गहरे समुद्र में अनुसंधान एवं संसाधनों के दोहन की नई तकनीकों की प्रत्यक्ष जानकारी मिली है। यह सफलता भारत को गहरे समुद्र अन्वेषण में आत्मनिर्भर बनाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर खोलेगी। मुझे गर्व है कि मैं इस ऐतिहासिक उपलब्धि का हिस्सा बन पाया हूं और देश का प्रतिनिधित्व कर सका।
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परिवार ने हौसला बढ़ाया -
उन्होंने बताया कि उनके पिता कैप्टन मनमोहन सिंह, माता सुरिंदर कौर, पत्नी बलजोत कौर (शिक्षिका), बेटी अजोनी कौर, बेटा जोबनदीप सिंह और बहनें सरबजीत कौर व मनप्रीत कौर (दोनों शिक्षिका) हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे हैं। परिवार का निरंतर मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सहयोग ही मेरे साहस और आत्मविश्वास की असली ताकत रहा है।
कैप्टन जतिंदर बताते हैं ,यह मिशन भारत सरकार के समुद्रयान कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी अगली कड़ी होगी स्वदेशी-मत्स्य 6000 सबमर्सिबल की ऐतिहासिक डुबकी। भारत अब ऐसे छह देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है, जिनके पास मानवयुक्त गहरे समुद्र में जाने की क्षमता है। कमांडर जतिंदर बताते हैं कि भारत अब पिछलग्गू नहीं है। वह लीडर बन कर उभर रहा है। ये उपलब्धियां हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाली हैं।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत की डबल विजय बताते हुए कहा कि हमारे देश के लोग एक साथ अंतरिक्ष और महासागर दोनों में विश्व पटल पर एक नई पहचान बना रहे हैं।
कमांडर जतिंदर पाल सिंह की साहसिक उपलब्धि और देशभक्ति हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और भारत के आत्मनिर्भर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है।