जम्मू यूनिवर्सिटी: कोरोनाकाल में यूजी-पीजी के विद्यार्थियों को नहीं मिल रही डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा
डिजिटल मोड से पढ़ाई में हो रही दिक्कत, सिर्फ शोधार्थियों को मिली है यह सुविधा।
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कोविड के दौरान जम्मू विश्वविद्यालय में यूजी-पीजी के विद्यार्थियों को डिजिटल पुस्तकालय का लाभ नहीं मिल पाया है। इससे डिजिटल मोड से पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। हालांकि शोधार्थियों के लिए विश्वविद्यालय ने डिजिटल पुस्तकालय की व्यवस्था की है। पंजीकृत शोधार्थी दो साल से डिजिटल पुस्तकालय का लाभ ले रहे हैं। विश्वविद्यालय और इसके अधीन कॉलेजों के यूजी-पीजी छात्रों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है। अन्य राज्यों के बजाय जम्मू-कश्मीर में डिजिटल पुस्तकालयों का सिस्टम कमजोर है।
कोविड जैसी आपदा के दौरान इस कमजोर सिस्टम का खमियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। जम्मू विवि के छात्र और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश संयुक्त सचिव रमणीक शर्मा ने बताया कि महामारी के दौरान शोधार्थियों को तो डिजिटल सामग्री मिली हुई है। इसके लिए विवि ने शोधार्थियों को पंजीकृत किया है, लेकिन यूजी-पीजी के छात्रों को डिजिटल पुस्तकालय का लाभ नहीं मिल पाया है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय पुस्तकालय के लिए मिली निधि का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जबकि इस निधि का इस्तेमाल पुस्तकालयों का डिजिटाइजेशन करने में किया जाना चाहिए। पुस्तकें और पत्रिकाएं सभी ऑनलाइन होनी चाहिए, जिससे सभी छात्रों को डिजिटल मोड से पढ़ाई में आसानी हो सके।
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विवेकानंद चौक का पुस्तकालय भी बंद पड़ा
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रदेश मंत्री दीपक गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की हालत ठीक नहीं है। हालांकि कई बार पुस्तकालय अध्यक्ष को इस संबंधी ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन अभी तक संज्ञान नहीं लिया है। विवि के केंद्रीय पुस्तकालय में परीक्षा केंद्र बनाया गया है, जिससे तकरीबन 250 छात्रों के बैठने की जगह कम हो गई है। इस वजह से छात्रों को दिक्कत आती है।
बता दें कि जम्मू विश्वविद्यालय ने विवेकानंद चौक पर भी पुस्तकालय खोला है, लेकिन वह भी लंबे समय से बंद पड़ा है। छात्रों को उस पुस्तकालय का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि विश्वविद्यालय को जल्द सभी पुस्तकालयों की डिजिटाइजेशन करनी चाहिए।
पूरी कोशिश है कि पुस्तकालय का डिजिटाइजेशन किया जाए, ताकि शोधार्थी ही नहीं, पीजी के छात्रों को भी लाभ मिल सके। जितने नए एप लांच होते हैं, उन सभी का पुस्तकालय में प्रयोग किया जा रहा है। डिजिटल सुविधा दो साल से शुरू की गई है। कोविड के दौरान शोधार्थियों को डिजिटल मोड से सामग्री उपलब्ध कराई गई है। शोधार्थियों के अलावा छात्रों को भी यह सुविधा देने का प्रयास जारी है। धीरे-धीरे सभी कमियों को दूर किया जाएगा। - डॉ. गुरदेव सिंह, पुस्तकालय प्रभारी, जम्मू विश्वविद्यालय