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JU Prof Suicide: प्रो. चंद्रशेखर ने क्यों की खुदकुशी? एक महीने बाद भी नहीं मिला जवाब, SIT के खुलासे के इंतजार

Fri, 07 Oct 2022 03:56 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 07 Oct 2022 03:56 PM IST
सार

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की खुदकुशी के मामले को एक महीना हो गया है। इस मामले में एसआईटी जांच कर रही है। मामला धीरे धीरे ठंडे बस्ते में जाता हुआ नजर आ रहा है।

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jammu university prof chandershekhar suicide case family waiting for SIT report
Jammu University - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जम्मू यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की खुदकुशी को आज एक महीना हो गया है। लेकिन यह सवाल अब भी है कि आखिर चंद्रशेखर ने खुदकुशी क्यों की? यह सवाल चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का भी है, जो एसआईटी के खुलासे के इंतजार में है। अब तो उनको भी लगने लगा है कि इस मामले की जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

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उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को चंद्रशेखर ने मनोविज्ञान विभाग स्थित अपने कमरे में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। चंद्रशेखर मरने से पहले एक बोर्ड पर लिख कर चले गए कि सब सच है, लेकिन कहानी झूठी है। इस कहानी कर सच झूठ क्या है, यह आज एक महीने के बाद भी सामने नहीं आया है। मौत के बाद यह सामने आया था कि चंद्रशेखर पर उनकी ही छात्राओं ने यौत उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
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इसकी जांच यूनिविर्सिटी की कैश कमेटी को दी गई। कैश कमेटी ने चंद्रशेखर को निलंबित करने की सिफारिश की थी। निलंबित होते ही चंद्रशेखर ने खुदकुशी कर ली थी। बाद में जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो सामने आया कि मनोविज्ञान विभाग की एचओडी से चंद्रशेखर आहत थे। उनके परिवार ने एचओडी और विवि प्रशासन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ भी इसे लेकर विवि प्रशासन के विरोध में उतरा।
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मामले को तूल पकड़ता देख एसपी साउथ ममता शर्मा की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया गया। लेकिन आज एक महीने के बाद भी एसआईटी इस मामले की जांच को पूरा नहीं कर पाई। जबकि इस मामले से जुड़े तमाम लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब तो यह मामला धीरे धीरे ठंडे बस्ते में जाता हुआ नजर आ रहा है।


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अब कोई भी नहीं उठा रहा आवाज
 
चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अब कोई भी इसकी आवाज नहीं उठा रहा। अब तक एसआईटी की ओर से भी कोई जानकारी नहीं मिली है कि आखिर इस मामले में हुआ क्या और वह किस नतीजे तक पहुंचे हैं।

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