संगीत बिना दो साल से बेरौनक पुंछ हाउस
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जेयू के तहत फाइन आर्ट्स एंड म्यूजिक की कक्षाएं जिस पुंछ हाउस में लगती थीं, वह दो साल से मरम्मत का इंतजार कर रहा है। दो साल पहले इसे खाली कराकर कक्षाओं को यहां से तकरीबन पांच किलोमीटर दूर किराये के भवन में लगाया जा रहा है।
वर्तमान में यहां दो सौ विद्यार्थी हुनर सीख रहे हैं। बदकिस्मती यह है कि पुंछ हाउस के जीर्णोद्धार के लिए अब तक सिर्फ डीपीआर ही तैयार की जा सकी है।
इस पर रोना यह कि इसे मंजूरी के लिए विभाग की ओर से अभी भेजा तक नहीं गया है। संभावना है कि एक या दो दिन में जेयू प्रशासन को भेज दिया जाएगा।
करीब दो दशक से फाइन आर्ट्स एवं म्यूजिक की कक्षाएं तालाब तिल्लो मार्ग पर स्थित पुंछ हाउस लगाई जा रही थीं।
घुड़साल से बना फाइन आर्ट्स एंड म्यूजिक इंस्टिट्यूट
पुंछ हाउस को वर्ष 1915 में पुंछ के एक राजा बनवाया था। उस दौरान इसका इस्तेमाल राजा के गेस्ट हाउस के रूप में होता था। राजा ने पंजतीर्थी में घुड़साल का भी निर्माण कराया था।
इसके बाद इस इमारत में जेयू की फाइन आर्ट्स एंड म्यूजिक की कक्षाओं को लगाया जाने लगा। वक्त के साथ पुंछ हाउस की इमारत पुरानी होती गई, जिसकी दो साल पहले मरम्मत महसूस की गई।
अब हाल यह है कि इसे जीर्णोद्धार के लिए खाली जरूर करा लिया गया, लेकिन किस्मत में कोई फेर नहीं आया। इसके बजाय यह और बदहाल होती गई। वर्तमान में पुंछ हाउस का परिसर चारागाह बनता जा रहा है। यहां कचरा फैला रहता है और मवेशी घूमते नजर आते हैं।
जम्मू विश्वविद्यालय डोगरी विभाग की एचओडी प्रो. अर्चना केसर ने बताया कि पुंछ हाउस की मरम्मत के लिए डीपीआर तैयार कराई गई है। दिसंबर तक मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा।