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Jammu Result: जम्मू के हिंदू बहुल इलाकों में कांग्रेस को अस्तित्व बचाने की चुनौती... ये दो बड़े नेता भी हारे
Mon, 14 Oct 2024 11:22 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 14 Oct 2024 11:22 AM IST
सार
जम्मू के हिंदू बहुल इलाकों में कांग्रेस को अस्तित्व बचाने की चुनौती है। एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के दो बड़े नेता भी अपनी सीट नहीं बचा पाए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एक समय जम्मू संभाग में दबदबा रखने वाली कांग्रेस के सामने अब हिंदू बहुल इलाकों मेंअस्तित्व बचाने की चुनौती है। हिंदु बहुल इलाकों में कांग्रेस का लगातार दूसरी बार खाता न खुलना पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।
चुनाव से पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदला, कार्यकारी अध्यक्ष बदलकर उसकी जगह दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए। बिश्नाह से एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष नीरज, पुंछ के सुरनकोट से आल इंडिया युवा कांग्रेस के महासचिव रहे मोहम्मद शाहनवाज को मैदान में उतारा।
पार्टी ने कई पुराने चेहरों को मैदान में उतारा, बावजूद इसके जम्मू संभाग में एकमात्र राजोरी सीट मिली। कांग्रेस को जम्मू, सांबा, कठुआ और उधमपुर जिलों में एक भी सीट नहीं मिल सकी।
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ये इलाके हिंदु बहुल हैं। राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन जैसे मुस्लिम और हिंदु मिश्रित जनसंख्या वाले इलाकों में भी पार्टी को एक सीट नसीब हुई। सिर्फ कश्मीर संभाग से पार्टी को नेकां के साथ गठबंधन करते हुए प्रदेश में छह सीटें नसीब हुईं।
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चुनाव से पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदला, कार्यकारी अध्यक्ष बदलकर उसकी जगह दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए। बिश्नाह से एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष नीरज, पुंछ के सुरनकोट से आल इंडिया युवा कांग्रेस के महासचिव रहे मोहम्मद शाहनवाज को मैदान में उतारा।
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पार्टी ने कई पुराने चेहरों को मैदान में उतारा, बावजूद इसके जम्मू संभाग में एकमात्र राजोरी सीट मिली। कांग्रेस को जम्मू, सांबा, कठुआ और उधमपुर जिलों में एक भी सीट नहीं मिल सकी।
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ये इलाके हिंदु बहुल हैं। राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन जैसे मुस्लिम और हिंदु मिश्रित जनसंख्या वाले इलाकों में भी पार्टी को एक सीट नसीब हुई। सिर्फ कश्मीर संभाग से पार्टी को नेकां के साथ गठबंधन करते हुए प्रदेश में छह सीटें नसीब हुईं।
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सिर्फ भाजपा से नहीं, पूरे तंत्र से लड़ाई थी
एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष और बिश्नाह से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले नीरज कुंदन पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे। वे 37 हजार के करीब वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे। नीरज अपनी हार पर कहते हैं कि उनकी लड़ाई सिर्फ भाजपा से नहीं थी। पूरा तंत्र उनके खिलाफ था। भाजपा की तरफ से हिंदू सीएम का झूठा वादा लोगों से किया गया। लोगों के बीच पैसा और शराब बंटे।
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