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Jammu News: जम्मू रेलवे स्टेशन पर पेयजल संकट, 50 हजार यात्रियों के लिए एक वाटर कूलर
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जम्मू। आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी के बीच रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। मुख्य प्लेटफॉर्म पर रोजाना करीब 50 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है लेकिन पेयजल जैसी जरूरी सुविधा बेहद सीमित है। हालात इस कदर बदतर हैं कि पूरे परिसर में यात्रियों के लिए सिर्फ एक ही वाटर कूलर चालू है जिस पर दिनभर पानी भरने के लिए कतार लगी रहती है।
सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक ट्रेन पकड़ने और उतरने वाले हजारों मुसाफिरों को भीषण गर्मी में ठंडा पानी पीने के लिए भटकना पड़ रहा है। प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन के बीच दो वाटर कूलर लगाए गए हैं लेकिन इनमें सिर्फ एक ही काम कर रहा है और दूसरा लंबे समय से बंद है। ऐसे में एक वाटर कूलर पर इतनी भीड़ है कि कई बार यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। अव्यवस्था के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है।
इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म नंबर एक के हालात तो और भी ज्यादा चिंताजनक हैं। यात्रियों को शीतल जल उपलब्ध कराने के लिए एक भी वाटर कूलर नहीं लगाया गया है। इसके अलावा पानी की कई टोटियां खराब पड़ी हैं जिस कारण बाकी टोटियों में पानी का दबाव कम रहता है। जब भी कोई ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकती है तो पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। यात्रियों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में भी रेलवे प्रशासन की ओर से पर्याप्त और पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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ट्रेन आते ही मच जाती है अफरा-तफरी
जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकती है, यात्रियों की भारी भीड़ एकमात्र वर्किंग वाटर कूलर पर टूट पड़ती है। अचानक मांग बढ़ने से पानी का दबाव एकदम कम पड़ जाता है, जिससे कई यात्रियों को बिना पानी लिए ही अपनी बोगियों में वापस लौटना पड़ता है। पानी की किल्लत के कारण बच्चों को बिलखते और बुजुर्गों को परेशान होते साफ देखा जा सकता है।
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लवे स्टेशन पर पानी की व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। वाटर कूलर पर इतनी लंबी लाइन रहती है कि ट्रेन छूटने के डर से पानी भरना नामुमकिन हो जाता है। मजबूरी में जेब ढीली कर पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं।
-देशराज, यात्री (लखनऊ)
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प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर नहीं लगाया गया है। कई टोटियां या तो टूटी हैं या खराब हैं और जिनमें पानी आता भी है उसका दबाव कम है। इतने बड़े और भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर ऐसी बदइंतजामी रेलवे की लापरवाही को दर्शाती है।
-संजय, यात्री (पंजाब)
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जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है, वाटर कूलर के पास मेला सा लग जाता है। भीड़ बढ़ने के कुछ ही देर बाद पानी का दबाव एकदम खत्म हो जाता है और कई बार तो टोटियों से पानी आना ही बंद हो जाता है।
- सुगम, यात्री (झांसी)
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मेडिकल कॉलेज में मिल रहा ठंडा पानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ओपीडी के बाहर वाटर कूलर ठीक है जहां मरीज व तीमारदार को पानी की सुविधा मिल रही है। सुपरिंटेंडेंट डॉ. बीरेंद्र त्रिसल ने बताया कि गर्मी से पहले ही खराब टोटियों को ठीक करवा दिया था। अस्पताल में 24 घंटे ठंडे पानी की सुविधा दी जा रही है। सेवा भारती में भोजनालय के बाहर भी वाटर कूलर चालू हालात में हैं।
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चिड़ियाघर के बाड़ों में पानी की पूरी व्यवस्था
जम्मू चिड़ियाघर में जानवरों खासकर भालू, दरियाई घोड़ों, हिरण, नीलगाय, चीतल, चीता, तेंदुआ आदि को गर्मी से बचाने के लिए बाड़ों में खास इंतजाम किए गए हैं। जानवरों को सुबह, दोपहर व शाम को नहलाया जा रहा है। चेन्नई से लाए गए दरियाई घोड़ों के जोड़े के लिए ठंडे पानी का प्रबंध किया गया है। वाइल्ड लाइफ वार्डेन अमरीक सिंह ने बताया कि जानवरों की सेहत गर्मी के मौसम में बेहतर रहे इसके लिए तरबूज, खीरा, ककड़ी और फल दिए जा रहे हैं। जंगली जानवरों को पसंद का भोजन दिया जा रहा है।
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सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक ट्रेन पकड़ने और उतरने वाले हजारों मुसाफिरों को भीषण गर्मी में ठंडा पानी पीने के लिए भटकना पड़ रहा है। प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन के बीच दो वाटर कूलर लगाए गए हैं लेकिन इनमें सिर्फ एक ही काम कर रहा है और दूसरा लंबे समय से बंद है। ऐसे में एक वाटर कूलर पर इतनी भीड़ है कि कई बार यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। अव्यवस्था के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है।
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इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म नंबर एक के हालात तो और भी ज्यादा चिंताजनक हैं। यात्रियों को शीतल जल उपलब्ध कराने के लिए एक भी वाटर कूलर नहीं लगाया गया है। इसके अलावा पानी की कई टोटियां खराब पड़ी हैं जिस कारण बाकी टोटियों में पानी का दबाव कम रहता है। जब भी कोई ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकती है तो पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। यात्रियों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में भी रेलवे प्रशासन की ओर से पर्याप्त और पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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ट्रेन आते ही मच जाती है अफरा-तफरी
जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकती है, यात्रियों की भारी भीड़ एकमात्र वर्किंग वाटर कूलर पर टूट पड़ती है। अचानक मांग बढ़ने से पानी का दबाव एकदम कम पड़ जाता है, जिससे कई यात्रियों को बिना पानी लिए ही अपनी बोगियों में वापस लौटना पड़ता है। पानी की किल्लत के कारण बच्चों को बिलखते और बुजुर्गों को परेशान होते साफ देखा जा सकता है।
लवे स्टेशन पर पानी की व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। वाटर कूलर पर इतनी लंबी लाइन रहती है कि ट्रेन छूटने के डर से पानी भरना नामुमकिन हो जाता है। मजबूरी में जेब ढीली कर पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं।
-देशराज, यात्री (लखनऊ)
प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर नहीं लगाया गया है। कई टोटियां या तो टूटी हैं या खराब हैं और जिनमें पानी आता भी है उसका दबाव कम है। इतने बड़े और भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर ऐसी बदइंतजामी रेलवे की लापरवाही को दर्शाती है।
-संजय, यात्री (पंजाब)
जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है, वाटर कूलर के पास मेला सा लग जाता है। भीड़ बढ़ने के कुछ ही देर बाद पानी का दबाव एकदम खत्म हो जाता है और कई बार तो टोटियों से पानी आना ही बंद हो जाता है।
- सुगम, यात्री (झांसी)
मेडिकल कॉलेज में मिल रहा ठंडा पानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ओपीडी के बाहर वाटर कूलर ठीक है जहां मरीज व तीमारदार को पानी की सुविधा मिल रही है। सुपरिंटेंडेंट डॉ. बीरेंद्र त्रिसल ने बताया कि गर्मी से पहले ही खराब टोटियों को ठीक करवा दिया था। अस्पताल में 24 घंटे ठंडे पानी की सुविधा दी जा रही है। सेवा भारती में भोजनालय के बाहर भी वाटर कूलर चालू हालात में हैं।
चिड़ियाघर के बाड़ों में पानी की पूरी व्यवस्था
जम्मू चिड़ियाघर में जानवरों खासकर भालू, दरियाई घोड़ों, हिरण, नीलगाय, चीतल, चीता, तेंदुआ आदि को गर्मी से बचाने के लिए बाड़ों में खास इंतजाम किए गए हैं। जानवरों को सुबह, दोपहर व शाम को नहलाया जा रहा है। चेन्नई से लाए गए दरियाई घोड़ों के जोड़े के लिए ठंडे पानी का प्रबंध किया गया है। वाइल्ड लाइफ वार्डेन अमरीक सिंह ने बताया कि जानवरों की सेहत गर्मी के मौसम में बेहतर रहे इसके लिए तरबूज, खीरा, ककड़ी और फल दिए जा रहे हैं। जंगली जानवरों को पसंद का भोजन दिया जा रहा है।