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Jammu News: आजादी के 76 साल बाद भी गांव शमशेर व जट में सड़कें कच्चीं, रास्ते उबड़-खाबड़
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नहीं लग पाई हैं लाइटें, रात को घर तक पहुंचने के लिए होता टाॅर्च का इस्तेमाल
बिजली गुल होने पर पानी आता है दूसरे दिन, कचरा फेंका जाता है खुले में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आजादी के 76 साल बाद पंचायतों में चंहुमुखी विकास हुआ है। लेकिन, मिश्रीवाला पंचायत के वार्ड 10 के गांव शमशेर, जट काॅलोनी की किस्मत न तो मनरेगा और न ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना बदल पाई है। हालत यह है कि यहां पर सड़कें कच्ची तो रास्ते उबड़-खाबड़ हैं।
इससे स्थानीय लोगों को आने जाने में परेशानी पेश आती है। दस साल पहले सड़कों में कंकरा बिछाया गया था, जिसका अब नामोनिशान नहीं है। यहां पर करीब एक हजार से ज्यादा आबादी रहती है। गांवों में अन्य पंचायतों की तर्ज पर सोलर लाइट या स्ट्रीट लाइट की सुविधा नहीं है।
शाम को लोगों को टार्च की रोशन से घर पहुंचना पड़ता है। मिश्रीवाला से गांव को जोड़ने वाली सड़कों से तारकोल उखड़ चुकी है। गड्ढे ही गड्ढे पड़े हैं। बारिश में वाहन चालक और राहगीर परेशान होते हैं। घरों का कचरा नालों और नालियों में फेंका जाता है। खुली जगहों में कचरे के ढेर लगे हैं।
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यहां पर पानी की सुविधा के लिए नलकूल या फिर हैंडपंप अभी तक नहीं लग पाए है। गर्मी के मौसम में लोगों को टैंकर से पानी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार लोग सुविधाओं के लिए प्रधान या फिर अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं मगर अभी तक यहां पर काम नहीं हो पाया है।
ग्रामीण कर्ण सिंह, जय देव सिंह, संजय सिंह व रतन लाल ने कहा कि जो हाल आजादी से पहले थे, अब भी वैसा ही हैं। पंचायतों में विकास की नई गाथा लिखी गई मगर इन गांवों में किसी की नजर नहीं पड़ी।
लोगों की परेशानी, उन्हीं की जुवानी
सड़क में दस साल पहले रोड़ी बिछी थी, जो बारिशों में बह गई है। लोगों को आने जाने में परेशानी आती है। सड़कें बदहाल व रास्ते उखड़-खाबड़ हैं।
-सपाल शर्मा, निवासी जट गांव
बिजली कटौती के कारण पानी की किल्लत रहती है। दूसरे दिन पानी मिलता है। यहां पर कोई भी हैंडपंप यहां पर नहीं लगाया गया है।
- प्रीत्तम सिंह, निवासी, जट गांव
गलियों का हालबेहाल है। यहां पर लाइट की सुविधा नहीं है। सोलर लाइट लगनी जरूरी है। रात को आने जाने में काफी परेशानी आती है।
- कमलेश कुमारी, शमशेर गांव
गर्मी के मौसम में परेशानी आती है। पानी न आने पर टैंकर हायर कर मंगवाने पड़ते हैं। इलाके में लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए।
- राज कुमारी, निवासी, शमशेर गांव
ये सुविधाएं मिलती हैं पंचायतों में
ग्राम पंचायतें गांवों की स्वच्छता, रोशनी, सड़कों, औषधालयों, कुओं की सफाई और मरम्मत सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करती हैं।
क्या सुविधाएं मिल रही ग्रामीण को
यहां पर एक पीएचसी की सुविधा है। गंभीर बीमारी होने पर जीएमसी लाना पड़ता है। ओवरहेड टैंक की सुविधा है, जहां से पानी गांव तक पहुंचता है। गांवों के पास ही मिडिल स्कूल भी है। उच्च शिक्षा के मिश्रीवाला आना पड़ता है।
सड़क निर्माण के लिए प्रयास जारी है। लोगों से जमीन देने के लिए संपर्क जा रहा है। सोलर लाइटें लगाने के लिए गुजारिश की गई है। मंजूरी के बाद यहां पर सुविधा दी जाएगी। हैंडपंप के लिए जलशक्ति विभाग से संपर्क किया गया है। पहले कार्रवाई बीच में रुकने से नहीं लग पाया है।
- इंजी. पल्लवी वर्मा, पूर्व प्रधान, मिश्रीवाला
पंचायतों से आने वाले प्रस्तावों पर काम पंचायतों में करवाया जा रहा है। विकास के लिए 23-23 लाख आवंटित किए गए हैं। जहां पर काम बचा है, इन जगहों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- सुनील शर्मा, बीडीओ, भलवाल
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बिजली गुल होने पर पानी आता है दूसरे दिन, कचरा फेंका जाता है खुले में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आजादी के 76 साल बाद पंचायतों में चंहुमुखी विकास हुआ है। लेकिन, मिश्रीवाला पंचायत के वार्ड 10 के गांव शमशेर, जट काॅलोनी की किस्मत न तो मनरेगा और न ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना बदल पाई है। हालत यह है कि यहां पर सड़कें कच्ची तो रास्ते उबड़-खाबड़ हैं।
इससे स्थानीय लोगों को आने जाने में परेशानी पेश आती है। दस साल पहले सड़कों में कंकरा बिछाया गया था, जिसका अब नामोनिशान नहीं है। यहां पर करीब एक हजार से ज्यादा आबादी रहती है। गांवों में अन्य पंचायतों की तर्ज पर सोलर लाइट या स्ट्रीट लाइट की सुविधा नहीं है।
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शाम को लोगों को टार्च की रोशन से घर पहुंचना पड़ता है। मिश्रीवाला से गांव को जोड़ने वाली सड़कों से तारकोल उखड़ चुकी है। गड्ढे ही गड्ढे पड़े हैं। बारिश में वाहन चालक और राहगीर परेशान होते हैं। घरों का कचरा नालों और नालियों में फेंका जाता है। खुली जगहों में कचरे के ढेर लगे हैं।
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यहां पर पानी की सुविधा के लिए नलकूल या फिर हैंडपंप अभी तक नहीं लग पाए है। गर्मी के मौसम में लोगों को टैंकर से पानी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार लोग सुविधाओं के लिए प्रधान या फिर अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं मगर अभी तक यहां पर काम नहीं हो पाया है।
ग्रामीण कर्ण सिंह, जय देव सिंह, संजय सिंह व रतन लाल ने कहा कि जो हाल आजादी से पहले थे, अब भी वैसा ही हैं। पंचायतों में विकास की नई गाथा लिखी गई मगर इन गांवों में किसी की नजर नहीं पड़ी।
लोगों की परेशानी, उन्हीं की जुवानी
सड़क में दस साल पहले रोड़ी बिछी थी, जो बारिशों में बह गई है। लोगों को आने जाने में परेशानी आती है। सड़कें बदहाल व रास्ते उखड़-खाबड़ हैं।
-सपाल शर्मा, निवासी जट गांव
बिजली कटौती के कारण पानी की किल्लत रहती है। दूसरे दिन पानी मिलता है। यहां पर कोई भी हैंडपंप यहां पर नहीं लगाया गया है।
- प्रीत्तम सिंह, निवासी, जट गांव
गलियों का हालबेहाल है। यहां पर लाइट की सुविधा नहीं है। सोलर लाइट लगनी जरूरी है। रात को आने जाने में काफी परेशानी आती है।
- कमलेश कुमारी, शमशेर गांव
गर्मी के मौसम में परेशानी आती है। पानी न आने पर टैंकर हायर कर मंगवाने पड़ते हैं। इलाके में लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए।
- राज कुमारी, निवासी, शमशेर गांव
ये सुविधाएं मिलती हैं पंचायतों में
ग्राम पंचायतें गांवों की स्वच्छता, रोशनी, सड़कों, औषधालयों, कुओं की सफाई और मरम्मत सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करती हैं।
क्या सुविधाएं मिल रही ग्रामीण को
यहां पर एक पीएचसी की सुविधा है। गंभीर बीमारी होने पर जीएमसी लाना पड़ता है। ओवरहेड टैंक की सुविधा है, जहां से पानी गांव तक पहुंचता है। गांवों के पास ही मिडिल स्कूल भी है। उच्च शिक्षा के मिश्रीवाला आना पड़ता है।
सड़क निर्माण के लिए प्रयास जारी है। लोगों से जमीन देने के लिए संपर्क जा रहा है। सोलर लाइटें लगाने के लिए गुजारिश की गई है। मंजूरी के बाद यहां पर सुविधा दी जाएगी। हैंडपंप के लिए जलशक्ति विभाग से संपर्क किया गया है। पहले कार्रवाई बीच में रुकने से नहीं लग पाया है।
- इंजी. पल्लवी वर्मा, पूर्व प्रधान, मिश्रीवाला
पंचायतों से आने वाले प्रस्तावों पर काम पंचायतों में करवाया जा रहा है। विकास के लिए 23-23 लाख आवंटित किए गए हैं। जहां पर काम बचा है, इन जगहों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- सुनील शर्मा, बीडीओ, भलवाल